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एमडीयू में गुरु नानक वाणी उत्सव का आयोजन गुरु नानक देव ने समकालीन परंपराओं से प्राप्त धुनों, रागों तथा तालों का प्रयोग करते हुए की गुरमत संगीत की संघरचना-डा. कंवलजीत

संत बाबा जतेन्द्र सिंह ने दुर्लभ वाद्य यंत्र ताउस पर शान का वादन के साथ दी प्रस्तुति
हर्षित सैनी
रोहतक, 16 जनवरी। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के संगीत विभाग में संगीत कार्यक्रम श्रृंखला-2020 के अंतर्गत श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव को समर्पित गुरु नानक वाणी उत्सव का आयोजन किया गया।
बाबा बन्दा सिंह बहादुर की दसवीं पीढ़ी संत बाबा जतेन्द्र सिंह ने अपने संगतकर्त्ताओं के साथ प्रस्तुति दी। गुरमत संगीत, पंजाब के विद्वानों ने दुर्लभ वाद्य यंत्र ताउस पर शान का वादन किया। डा. अर्शप्रीत सिंह रिद्ध तथा डा. स्वरलीन कौर ने गुरु नानक वाणी का गायन किया। गुरमत संगीत के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के दौरान वाणी श्रोताओं एवं दर्शकों को गुरु वाणी के अंतर्निहित वादों से अवगत कराया।
मदवि के संगीत विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डा. हुकमचंद ने आमंत्रित संगीत विद्वानों एवं कलाकारों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने बताया कि संगीत श्रृंखला-2020 के अंतर्गत गुरु नानक वाणी उत्सव का आयोजन किया गया है।

कार्यक्रम में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध संगीताचार्य डा. कंवलजीत सिंह ने गुरु नानक वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला। डा. कंवलजीत ने बताया कि गुरु नानक देव जी ने समकालीन परंपराओं से प्राप्त धुनों, रागों तथा तालों का प्रयोग करते हुए गुरमत संगीत की संघरचना की।
इस अवसर पर प्रोफेसर लवलीन, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. विमल, डा. सौरभ वर्मा, सुरेंद्र, अशोक वर्मा सहित विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।