बीकानेर ।यह सच है कि बीकानेर में कोरोना जांच में कुछ पाबंदी लगी है। ऐसी शिकायतें मंत्री के पास गई है। कलक्टर साहब इससे क्या कोरोना हारेगा, बीकाणा जीतेगा ? जरा सोचिये यह
जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ तो नहीं है। कोई भी व्यक्ति यदि कोविड की जांच करवाना चाहे तो बिना ना नुकर के जांच नहीं होती। जांच नहीं होने से कोविड संक्रमित व्यक्ति आइसोलेशन में नहीं जाएगा। इससे संक्रमण बढ़ेगा। ऐसे व्यक्ति का समय पर इलाज भी नहीं हो सकेगा पूरे शहर के जांच केन्द्रों मे यही स्थिति है। कोरोना मानवीय त्रासदी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोरोना महामारी को लेकर सलाह है- ट्रेसिंग ( रोगी का पता लगाना), टेस्टिंग (जांच ), आइसोलेशन ( अलग रखना ) से महामारी को फैलने से रोका जा सकता है। इसकी पूरी तरह पालना नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में कोरोना के खिलाफ जन जागृति अभियान चलाया जा रहा है। ताकि आम लोग इस बीमारी के प्रति सर्तकता बरते। इस अभियान के ठीक उलट बीकानेर से लोगों ने डॉ. बी.डी कल्ला से शिकायतें कि है कि कोरोना जांच में आना कानी की जा रही है।

डॉक्टर की पर्ची पर ही जांच की पाबंदी लगाई गई है। डॉक्टरों को कम से कम जांच के निर्देश हैं। कल्ला ने वाकायदा इन शिकायतों पर नोटिस लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पाबंद किया गया है कि बीकानेर में कोरोना की जांच सम्बन्धी जो व्यवस्था चल रही है उसको जारी रखा जाए ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो ।। वास्तविक स्थिति यही है कि कोरोना जांच टालने की यथासंभव कोशिश होती है। अगर ये शिकायतें सही है तो जिला कलक्टर डब्ल्यूएचओ, भारत सरकार के दिशा निदेर्शों की पालना नहीं करवा पा रहा है। महामारी की इस संकट की घड़ी में प्रशासन से सही कदम उठाने की जनता को उम्मीद है।