बच्चों ने लिया जीवदया व पतंगबाजी नही करने का संकल्प, पोस्टर का हुआ विमोचन, सप्ताह भर चलेगा अभियान

बाड़मेर । 16 जनवरी । मकर संक्रान्ति पर्व के दौरान होने वाली पतंगबाजी से होने वाले नुकसान से आगाह करने को लेकर गुरूवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सांसियों का तला में संस्था प्रधान, इंड़िया अगेंस्ट वाॅयलेंस, बाड़मेर के जिला संयोजक व जिले में अहिंसा आन्दोलन से जुड़े मुकेश बोहरा अमन के सानिध्य में जीवदया व जीवरक्षा पोस्टर का विमोचन हुआ । इस 140 से अधिक बच्चों, युवाओं व विद्यालय स्टाफ ने जीवदया, जीवरक्षा व पतंगबाजी नही करने का संकल्प लिया । जीवदया व जीवरक्षा अभियान आगामी एक सत्पाह तक जारी रहेगा । जिसमें अलग-अलग कार्यक्रमों व गतिविधियों के माध्यम से आमजन को जीवदया जीवरक्षा के प्रति जागक किया जायेगा ।

इंड़िया अगेंस्ट वाॅयलेंस, बाड़मेर के जिला संयोजक व जिले में अहिंसा आन्दोलन से जुड़े मुकेश बोहरा अमन ने बच्चों को जीवदया, जीवरक्षा व पतंगबाजी नही करने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि मकर सक्रान्ति पर्व के उपलक्ष में हो रही पतंगबाजी में प्लास्टिक तत्वों से बना चाईनीज मांझा बेजुबान, निर्दाेष पंछियों के प्राण ले रहा है । चाईनीज मांझे का बढ़ता प्रचलन हमें धर्म से अधर्म की ओर से धकेल रहा है और हमें जीव-दया व दान-पुण्य की बजाय जीव-हत्या का दोषी बना रहा है । वहीं आसमान में अल्प्रातः व सायं के समय विशेष में पंछियों की उड़ान रहती है । ऐसे में इस समय दौरान होने वाली पतंगबाजी से बचकर हम आसमान के परिन्दों को जीवन का अनमोल तोहफा दे सकते है ।

मकर संक्रान्ति के पावन पर्व पर देश भर में जहां दान-पुण्य की पवित्र परम्पराएं मानव जीवन और संस्कृति का उच्चता प्रदान करते है वहीं मकर सक्रान्ति सेे जुड़ी पतंगबाजी की परम्परा में चाईनीज मांझे का चलन न केवल बेजुबान पंछियों बल्कि बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है ।

अमन ने कहा कि प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर चाईनीज मांझे पर सख्ती से कार्यवाही करनी चाहिए । ताकि चाईनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं आमजन एवं पंछियों को बचाया जा सके । वहीं आम नागरिकों को भी अपने शौक पर पंछियों के जीवन को अहमियत देनी चाहिए ।
पोस्टर विमोचन के दौरान विद्यालय स्टाफ डालूराम सेजू, उषा जैन, दीप्ति चैधरी, मिथलेश चैधरी, ग्रामीण युवा मदन सिसोदिया, प्रेम रामधारी, कालाराम, दीपक सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में विद्यालय के बच्चे उपस्थित रहे ।

‘‘‘‘चाईनीज मांझा बच्चों व पंछियों के लिए प्राणघातक है जो हमारी संस्कृति की मूल भावना को विकृत कर रहा है ।’’’’