हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताः मुख्यमंत्री

जयपुर, 20 मार्च। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में कोरोना वायरस का कम्यूनिटी में ट्रांसमिशन रोकना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार इसके लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। बचाव ही उपचार है इस बात को ध्यान में रखते हुए स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय में छात्रों का आना बन्द कर दिया गया है। विश्वविद्यालयों एवं स्कूली बोर्ड की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। धार्मिक स्थलों, पार्क एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए पूरे प्रदेश में धारा 144 लगाई गई है।

श्री गहलोत गुरूवार को कोरोना (कोविड-19) वायरस के व्यापक संक्रमण को रोकने के लिए सुझाव आमंत्रित करने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों, वरिष्ठ चिकित्सकों, रिसर्च स्कॉलर, कन्सलटेंटस, निजी मेडिकल कॉलेज एवं हाॅिस्पटल प्रबन्धन से जुड़े लोगों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, निजी अस्पतालों एवं चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का आह्वान किया कि वे कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में आगे बढ़कर सहयोग दें एवं आगे आने वाली किसी भी इमरजेंसी के लिए तत्पर रहें।

बैठक में इन विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनसे कोरोना वायरस का चैन ऑफ ट्रांसमिशन रोकने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने अभी तक राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कई फैसले लिए हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही कम करने के लिए धर्मगुरूओं के माध्यम से अपील की गई, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए है और धर्मस्थलों पर लोगों की संख्या काफी कम हुई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिए जाने का प्रयास किया जा रहा है। सवाई मानसिंह अस्पताल में जांच सुविधा बढ़ाकर दुगुनी की गई है। मास्क, सेनिटाइजर एवं जरूरी उपकरणों के साथ ही दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जो वायरस के संक्रमण को रोकने में मददगार सिद्ध होंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री रोहित कुमार सिंह ने बताया कि झुंझुनूं में तीन पॉजिटिव रोगी मिलने के बाद जिले में 350 टीमें भेजी गई हैं, जो सर्वे एवं स्क्रीनिंग कर कल अपनी रिपोर्ट सौंप देंगी। विभिन्न देशों की यात्रा से लौटे 1568 लोगों को क्वारंटाइन कर स्क्रींनिग की गई है। सभी मेडिकल कॉलेजों में रैपिड रेस्पोंस टीम बनाई गई है। स्टेट लेवल पर अलग से एक टीम बनाई गई है। निजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को आईसीएमआर की गाइडलाइन को फोलो करते हुए इमरजेंसी व्यवस्था के तहत आइसोलेशन बैड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सा शिक्षा सचिव श्री वैभव गालरिया ने बताया कि 5 मेडिकल कॉलेजों में अभी कोरोना की जांच सुविधा उपलब्ध है। अजमेर व कोटा मेडिकल कॉलेज में जल्द ही जांच सुविधा उपलब्ध होगी। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों में भी यह सुविधा उपलब्ध करवाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

एसमएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी ने बताया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज में कोरोना रोगियों के लिए डेडीकेटिड आईसीयू, क्वारंटाइन बैड एवं 24 घण्टे संचालित रहने वाली संक्रामक रोग ओपीडी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एसएमएस की वायरोलॉजी लैब को नेशनल वायरोलॉजी लैब की रेटिंग मिली है। चिकित्सकों एवं हैल्थ वर्कर्स को संभावित रोगियों एवं क्वारंटाइन किए गए लोगों को संभालने के लिए ट्रेनिंग दी गई है।

बैठक में आए निजी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल संचालकों ने कोरोना के खतरे से निपटने में हर संभव मदद का भरोसा दिया। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. एमएल स्वर्णकार ने कहा कि उनके यहां प्रतिदिन 500 जांचे करने की सुविधा अगले दो दिन बाद शुरू हो जाएगी, ऎसे में वे कम्यूनिटी स्क्रीनिंग में राज्य सरकार की मदद कर सकते हैं।

बैठक में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव ः-

1- संक्रमित व्यक्ति के लोगों से मिलने, सड़क एवं रेल मार्ग से एक जगह से दूसरी जगह जाने से इस वायरस के ज्यादा फैलने की आशंका रहती है। दूसरे राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की पूरी स्क्रीनिंग हो।

2- किसी भी व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने पर उसे पूरी तरह से आइसोलेशन में रखना काफी जरूरी है। खांसी, जुकाम वाले लोगों को सेल्फ आइसोलेशन में रहने के लिए जागरूक किया जाए। विशेषज्ञाें का कहना था कि जापान एवं हांगकांग जैसे देशों में खांसी, जुकाम होने पर लोगों ने अपने आप को आइसोलेट कर लिया और कम्यूनिटी में घुलना-मिलना बंद कर दिया, इससे वायरस को फैलने से रोकने में काफी मदद मिली।

3- जिला स्तर पर गेस्ट हाउस, हॉस्टल एवं कम्यूनिटी सेंटर्स को आइसोलेशन प्लेस अथवा क्वारंटाइन सेंटर के रूप में तैयार किया जा सकता है। हर अस्पताल में 10 बैड का आइसोलेशन वार्ड बनाया जाए, ताकि इमरजेंसी में काम आ सके।

4- वायरस के प्रभाव में आने का सबसे ज्यादा खतरा पॉजिटिव रोगियों का इलाज कर रहे चिकित्सकों एवं नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को होता है। ऎसे में उन्हें पर्याप्त मात्रा में मास्क एवं अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

5- एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर द्वारा कोरोना पॉजिटिव रोगियों के इलाज के लिए अपनाए गए तरीके एवं दवाओं के सम्बन्ध में जिला स्तर पर गाइडलाइन दी जाए। एपिडेमिक एक्ट का सख्ती से पालन कराया जाए। आइसोलेशन एवं क्वारंटाइन से भागने वाले संभावित रोगियों को सख्ती से रोका जाए।

6- कम्यूनिटी आधारित सर्विलान्स एवं मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाए और टेली मेडिसिन के माध्यम से प्रशिक्षत हेल्थ वर्कर्स सर्विलांस में मदद कर सकते हैं।

7- विशेषज्ञों ने खांसी, जुकाम के रोगियों को गर्म पानी पीने और भाप लेने की सलाह दी।

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, मुख्य सचिव श्री डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह श्री राजीव स्वरूप, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजाबाबू पंवार, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अशोक पानगडिया, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. सुभाष नेपालिया, आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. एसडी गुप्ता, एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र सिंह, इटर्नल हॉस्पिटल के डॉ. राजीव गुप्ता, नारायणा हॉस्पिटल के डॉ. प्रदीप गोयल सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए।