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जैन मंदिरों में श्रमदान से स्वच्छता व सौन्दर्यकरण अभियान 9 व 10 को

बीकानेर, 8 नवम्बर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती साध्वीश्री शशि प्रभाश्रीजी.म.सा. के सान्निध्य म 9 व 10 नवम्बर को श्री खरतरगच्छ युवा परिषद, खरतरगच्छ महिला परिषद, ज्ञान वाटिका के बच्चे और बीकानेर के श्रावक-श्राविकाएं जैन मंदिरों में स्वच्छता व सौन्दर्यकरण अभियान के लिए श्रमदान करेंगे।साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने गुरुवार को ढढ्ढा चैक के इन्द्रलोक में धर्मचर्चा में कहा कि जैन मंदिरों ’’जिनालयों’’ में तन, मन व धन से स्वच्छता अभियान में भागीदारी निभाने से पूजा का लाभ मिलता है तथा जिन शासन की प्रभावना में श्रीवृृद्धि होती है। बीकानेर में 45 प्राचीन कलात्मक जैन मंदिरों के कारण इसे तीर्थ स्थल कहा है।भांडाशाह, चिंतामणि, भगवान आदिनाथ, महावीर भगवान सहित यहां प्राय सभी 24 तीर्थंकरों के मंदिर है। मंदिर में दर्शन मात्र से पुण्य होता है। स्वच्छता व सौन्दर्यकरण अभियान में सेवाभाव से श्रमदान करने से पुण्यों का अर्जन और पापकर्मों का विसर्जन होगा। उन्होंने कहा कि जैन मंदिर जैन समाज ही नहीं बीकानेर, राजस्थान की धरोहर है। भांड़ाशाह जैन मंदिर को पुरातत्व की दृृष्टि से संरक्षित घोषित किया हुआ है। विश्व में यह एक मात्र 500 से अधिक पुराना मंदिर है जिसकी नींव में शुद्ध घी का उपयोग हुआ है।साध्वीश्रीजी को विनती- खरतरगच्छ युवक परिषद के अध्यक्ष राजीव खजांची के नेतृृत्व में एक दल ने साध्वीश्री कल्पलता जी.म.सा. से मोकलसर में दर्शन का आशीर्वाद लिया तथा आगामी चातुर्मास बीकानेर में करने की विनती की।अनेक सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री खराब- ढढ्ढा कोटड़ी में गुरुवार केा साध्वीश्री संवेग प्रज्ञा ने प्रवचन में कहा कि वर्तमान में सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री का प्रचलन अधिक बढ़ गया है। महिलाएं नहीं पुरुष भी बड़ी राशि व्यय कर रहे है। अधिकतर सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्री में केमिकल व पशुओं की चर्बी सहित अनेक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व मिलाएं जाते है । उन्होंने कहा कि बाहरी सौन्दर्य की बताएं आंतरिक सौन्दर्य बढ़ाएं । शाकाहारी, पौष्टिक आहार से तथा अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाएं। नियमित धर्म ध्यान करें।