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निर्जला एकादशी पर भक्ति संगीत संध्या का हुआ आयोजन

बीकानेर। निर्जला एकादशी गुरूवार को लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर गणेश मंदिर के पास रात्रि को भक्तिमय भक्ति संगीत संध्या का आयोजन किया गया।  जिला प्रशासन व श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर विकास एवं पर्यावरण समिति की ओर से आयोजित इस भक्ति संगीत संध्या में राजस्थान संगीत नाटक आकादमी, जोधपुर के दीपक कुमार एण्ड पार्टी,सुश्री कौशल्या रामावत और स्थानीय कलाकारों द्वारा दी गई भक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।


समारोह के मुख्य अतिथि ऊर्जा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, कला, संस्कृति, साहित्य एवं पुरातत्व विभाग मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से मन को शान्ति और सुकून मिलता हैं। मन में ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ती है। भक्ति गीतों से मन में परमात्मा का संचार का अनुभव होता है और पूरा जीवन ही ईश्वर के प्रति सम्पर्ण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अगर हम ईश्वर से प्रेम करना सीखेंगे,तो सारा जीवन आनंदमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि समय-समय में ऐसे आयोजन होने चाहिए। बीकानेर में भक्ति संगीत की परम्परा रही है। इसे और प्रोत्साहित किया जायेगा।

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निर्जला एकादशी का महत्व- डॉ.कल्ला ने निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्त्व रखता है। इस व्रत को भीमसेन एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि पाँच पाण्डवों में एक भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और वैकुंठ को गए थे।इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी भी हुआ।
उन्होंने कहा कि सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत कर लेने से अधिकमास की दो एकादशियों सहित साल की 25 एकादशी व्रत का फल मिलता है। जहाँ साल भर की अन्य एकादशी व्रत में आहार संयम का महत्त्व है। वहीं निर्जला एकादशी के दिन आहार के साथ ही जल का संयम भी जरूरी है। इस व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है यानि निर्जल रहकर व्रत का पालन किया जाता है। यह व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है। यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है।

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जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि आगे भी इस परिसर में भक्ति संगीत के कार्यक्रम हो। इसके लिए प्रशासन सहयोग करेगा। उन्होंने श्री लक्ष्मीनाथ मन्दिर विकास एवं पर्यावरण समिति द्वारा मंदिर में परिसर में की गई गतिविधियों की सराहना की। श्री लक्ष्मीनाथ मन्दिर विकास एवं पर्यावरण समिति के सचिव सीताराम कच्छावा ने समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों और कलाकारों की जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ.सिद्धार्थ असवाल सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरूष ने भक्ति संगीत का आनंद लिया। संचालन उपनिदेशक सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय विकास हर्ष ने किया।

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