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पारंपरिक खेलों के उत्सव “धाड़ धुक्कड़” का समापन शुक्रवार को

बीकानेर। श्री गोपेश्वर विद्यापीठ सैकेंडरी स्कूल के करुणा एवं ईको क्लब द्वारा राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड के स्थानीय संघ, गंगाशहर के परिसर में आयोजित किए जा रहे त्रिदिवसीय पारंपरिक खेल उत्सव “धाड़ धुक्कड़” के तीसरे दिन खो खो, आग लगी है पानी लाओ, मटकी फोड़ स्पर्धा के खेलों के आयोजन हुए। विद्यापीठ के समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि इस आयोजन से स्टूडेंट्स इतने खुश हैं कि आज उन्होंनें जिद्द पकड़ ली कि कम से कम दो दिन इस आयोजन को और बढाया जाए। उनकी इस जिद्द को मानते हुए विद्यापीठ प्रबंधन ने खेल उत्सव का एक दिन और बढा दिया है। धाड़ धुक्कड़ का समापन अब शुक्रवार को होगा।

मैं तो धन्य हो गई
मैं कक्षा सातवीं की स्टूडेंट हूँ, मुझे ये खेल बिल्कुल नए लग रहे हैं, लेकिन हमारे टीचर्स बताते हैं कि ये खेल उनके भी दादा दादी, नाना नानी के बचपन के खेल हैं, यदि ऐसा है तो निश्चित रूप से हमारे पूर्वजों के पास जो थाती थी, वह अतुल्य है। मुझे गर्व होता है कि मैं भारत की नागरिक हूँ और मैं अपने शाला प्रबंधन के प्रति कृतज्ञ हूँ कि हमें हमारे देश की परंपरागत संस्कृति, उत्सव व खेलों से जोड़ने के लिए समय समय पर अनेकानेक गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहता है।

(धाड़ धुक्कड़ की संभांगी राजिका राजपुरोहित के विचार)