कानपुर|प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के 3592.48 करोड़ रुपये हड़पने के मामले में कानपुर की मल्टीनेशनल कमोडिटी कंपनी फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के संचालकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज कर छानबीन शुरू की है। सीबीआई ने जनवरी में फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के कानपुर और मुंबई समेत देश भर में स्थित 13 ठिकानों में छापेमारी की थी। सीबीआई दिल्ली ने 19 जनवरी को कंपनी संचालक कानपुर के आजाद नगर निवासी उदय जयंत देसाई, उनके बेटे संजय उदय देसाई व सुनील लालचंद वर्मा समेत 13 नामजद व अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। फ्रॉस्ट इंटरनेशनल कंपनी का आफिस मुंबई के बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स के पते पर रजिस्टर्ड कराया गया था। कंपनी संचालकों पर 14 बैंकों के 3592.42 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है। बैंक आफ इं

डिया के 606 करोड़ रुपये इस कंपनी में डूबे हैं।

कंपनी के निदेशक व कुछ अन्य लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों से लोन लेकर उनकी रकम हड़प ली। यह भी आरोप है कि निदेशकों का कोई वास्तविक कारोबार था ही नहीं।विदेश में कारोबार का हवाला देकर फर्जी ढंग से लोन पास कराए गए। व्यापारिक गतिविधियों की आड़ में लोन की रकम को इधर-उधर निवेश किया गया। पूरे मामले में कई बैंक अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर के जोनल मैनेजर प्रशांत कुमार सिंह ने सीबीआई से पूरे मामले की शिकायत की थी। सीबीआई के केस को आधार बनाकर ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी का शिकंजा जल्द नामजद आरोपितों पर कसेगा।दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय के अधिकारियों ने लखनऊ स्थित जोनल मुख्यालय को बैंक फ्रॉड के नौ बड़े मामलों में केस दर्ज कर जांच का टारगेट दिया है। सूत्रों का कहना है कि चार बैंक फ्रॉड के मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किए जाने का अप्रूवल दे दिया गया है। मार्च तक ईडी बैंक फ्रॉड के आठ अन्य मामलों में भी केस दर्ज कर जांच के कदम बढ़ाएगी।