– नवरात्रि ज्ञान की शक्ति से मन को स्वच्छ व सकारात्मक बनाने की अवसर है

रिपोर्ट – सुधांशु कुमार सतीश

सिमराही बाजार (सुपौल)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिमराही बाजार के स्थानीय ओम शांति केंद्र पर नवरात्रि के अवसर में नौ कुमारियों को पूजा एवं झाँकी सजाकर भव्य स्नेह मिलन कार्यक्रम सम्पन हुआ। कार्यक्रम विधिवत रूप में सीमावर्ती क्षेत्र प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी के अध्यक्षता में दीप प्रज्वलन कर के शुभारम्भ हुवा।
सीमावर्ती क्षेत्र प्रभारी रंजु दीदी ने कार्यक्रम में पधारे सम्पूर्ण प्रभू प्रेमियों को संबोधित करते हुए अपने उद्बोधन में कहीं की नवरात्रि पर्व पवित्रता का प्रतीक है। मान्यता है कि इन 9 दिनों में रखे जाने वाले ब्रत हमारी आत्मा को शुद्धता और पवित्रता के लिए होते हैं। इसके साथ-साथ हमें अपने मन के विचारों की शुद्धि पर भी ध्यान देना चाहिए। तभी हम बेहतर बन पाएंगे और परिवारिक रिश्तो को मजबूत कर पाएंगे।

हर आत्मा के अंदर में देवी शक्तियां है। जिन्हें सिर्फ जागृत करने की जरूरत है। हम बचपन में से यही सीखते आए हैं कि जब जब नकारात्मक ऊर्जा का प्रकोप बढ़ेगा। तब उस पर विजय प्राप्त करने के लिए देवी शक्तियों का आह्वान किया जाएगा ।आज पूरे विश्व में भी भ्रष्टाचार अत्याचार परिवारों का टूटना और बहनों के साथ जो कुछ हो रहा है ।उसमें नेगेटिविटी चरम पर है ।जब भी बुरी शक्तियां होती है, तो उन पर विजय प्राप्त करने के लिए शक्तिशाली ताकतों की आवश्यकता होती हैं। इसके लिए हमें अपने अंदर शक्तियों का आह्वान करना होगा। हमने देवी के साथ हाथ मे तलवार, गदा, त्रिशूल दिखाया फिर देवी के हाथ में शंख और कलम के फूल भी दिखाते हैं यह साधन थे जिससे पवित्र शक्ति ने असुरों पर विजय प्राप्त की। यह पूरी तरह से प्रतिकार आत्मिक है। प्रेम, शांति, खुशी उन्हें देवी संस्कार कहते हैं। और काम, क्रोध, लोभ ,मोह, अहंकार, इत्यादि यह आसुरी संस्कार है। दोनों ही हर आत्माओं में है। दोनों जब मेरे अंदर ही है ।तो अपने देवी संस्कारों को अपने आसूरी संस्कारों से बचाने के लिए और उन पर विजय प्राप्त करने के लिए शक्तियों का आह्वान भी स्वयं के अंदर ही करना होगा। लेकिन हमने देवियों की मूर्तियों बनाई और उनके हाथों में अस्त्र शास्त्र और पैरों के नीचे एक राक्षस दिखाया। लेकिन उस प्रक्रिया को तो हमने किया ही नहीं जिससे हम आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त कर सकते थे। यह सांकेतिक चित्र तो हम बनाते हैं ।वह सिर्फ हमें याद दिलाने के लिए हैं कि हम सारी प्रक्रिया को हमें अपने अंदर ही करना है ।

सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्मा कुमारी बबीता दीदी ने अपने उद्बोधन में कहीं ज्ञान की कमी के कारण वर्तमान समय मानव के अंदर काम, क्रोध, लोभ ,मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, नफरत आदि राक्षसी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। जिसका कारण समाज में दिन-प्रतिदिन अपराध बढ़ते ही जा रही हैं। उन्होंने बताया अगर हमने अपनी भारतीय पुरानी सभ्यता, संस्कार ,परंपराएं पूर्व जनों की संस्कृति, सत्संग के माध्यम से फैलाई नहीं तो इस समाज में चलना, रहना, बैठना ,उठना जीना, बड़ा ही कठिन महसूस होगा। उन्होंने जीवन में सत्संग का महत्व बताते हुए कहा की सत्संग के द्वारा प्राप्त ज्ञान ही हमारी असली संपत्ति है। सत्संग के द्वारा प्राप्त शक्तियां, सद्गुण, विवेक द्वारा हम अपने कर्मों को सुधार सकते हैं। उक्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी ने किया।

मौके पर ब्रह्मा कुमार किशोर भाई जी, पूर्व प्रमुख विनय वर्धन, अनिल महतो ,बिमल गुप्ता, ब्रम्हाकुमारी दुर्गा बहन, ब्रह्माकुमारी जानकी बहन, ब्रह्माकुमारी कौशिल्या दीदी, मोसम बहन, पूजा बहन, बीना बहन, डॉ वीरेंद्र भाई, डॉक्टर रविंद्र भाई, प्रोफेसर बैजनाथ प्रसाद भगत, व्यवसायिक सचिन माधोगरिया, सतनारायण भाई, बेचू भाई ,तेज नारायण भाई इत्यादि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।