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रंगकर्म के क्षेत्र का उदीयमान नक्षत्रः विनोद पारीक

बीकानेर को रंगकर्म की राजधानी कहा जाता है। यहां के अनेक रंगकर्मियों ने देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसी परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं, युवा रंगकर्मी विनोद पारीक। पारीक अब तक 25 से अधिक नाटकों के 100 से अधिक मंचन में अभिनय एवं सहायक निर्देशक की भूमिका निभा चुके हैं। वहीं, 250 से अधिक नुक्कड़ नाटकों में अभिनय किया है। विनोद के मन बचपन से ही अभिनय के प्रति लगाव था। लगभग 18 वर्ष की आयु तक आते-आते यह जीजिविषा चरम तक पहुंची और वरिष्ठ रंगनिर्देशक दलीप सिंह भाटी के निर्देशन में विनोद ने ‘हस्ताक्षर’ के माध्यम से रंगकर्म के क्षेत्र में कदम रखा।

इसके बाद हरीश बी. शर्मा के ‘गोपींचद की नाव’, राजस्थानी भाषा के बहुचर्चित नाटक ‘बलिदान’ में अभिनय किया। एक बार रंगकर्म के क्षेत्र में आने के बाद पारीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दलीप सिंह भाटी के निर्देशन में निरंत अभिनय करता रहा। वर्ष 2013 राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के सयुक्त तत्वावधान् में आयोजित अभिनय कार्यशाला में चयनित होकर वरिष्ठ रंगनिर्देशक डॉ. रामगोपाल बजाज के निर्देशन में नाटक ‘खामोश, अदालत जारी है…’ में अभिनय किया तथा प्रोत्साहन स्वरूप प्रमाण-पत्र प्राप्त किया। पारीक को अब तक वर्ष 2008 में अर्पण आर्ट सोसायटी द्वारा प्रशस्ति पत्र, 2009 में बीकानेर रंग सम्मान, वर्ष 2011 में बीकानेर नगर के 524वें स्थापना दिवस पर राव बीकाजी संस्थान द्वारा सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2014 में शाहजहांपुर में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता में उनके द्वारा अभिनीत नाटक ‘मौत क्यों रात भर नहीं आती’ को सर्वश्रेष्ठ नाटक का सम्मान मिला। वर्ष 2015 में गुरुग्राम में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता में ‘कोर्ट मार्शल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्राप्त किया। इसी साल देहरादून में आयोजित प्रतियोगिता में भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता रहे। वर्ष 2016 में देहरी-आॅन-सोन (बिहार) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, इसी साल गुरुग्राम में आयोजित प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के साथ सर्वश्रेष्ठ सेट डिजायनर का पुरस्कार भी जीता।

पारीक अभी तक अनेक स्तरीय रंग निर्देशकों के साथ कार्य कर चुके हैं। कुल मिलाकर युवा रंगकर्मी विनोद पारीक का रंगकर्म के प्रति जुनून अकल्पनीय है। उनका प्रयास है कि बीकानेर के थिएटर को भी बड़े शहरों की तर्ज पर प्रोफेशनल रंगमंच बनाया जाए, जहां अधिक से अधिक युवाओं को मौका मिले। उनके लिए नियमित कार्यशालाओं का आयोजन हो। इन सबके बीच इस युवा रंगकर्मी में अनेक संभावनाएं हैं और यदि रंगकर्म के प्रति समर्पण की ज्योति प्रज्वलित रही तो यह युवा कलाकार एक दिन बीकानेर को नई पहचान दिलाएगा, इसमें कोई दोराय नहीं है।