सादा जीवन, उच्च विचार के धनी रहे कन्हैयालाल वक्र
श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन, साहित्यकार कन्हैयालाल वक्र को विभिन्न संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि,

बाड़मेर । बाड़मेर जिले के जाने-माने हिन्दी व राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कन्हैयालाल वक्र के देहावसान पर गुरूवार को गांधी चैक स्थित पेंशनर समाज भवन में विभिन्न संस्थाओं के बैनरतले श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया ।

कवि मुकेश बोहरा अमन ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक, वरिष्ठ साहित्यकार और पेंशनर समाज के सांस्कृतिक मंत्री स्वर्गीय श्री कन्हैयालाल जी वक्र के देहावसान से बाड़मेर साहित्य जगत एवं पेंशनर समाज में अपूरणीय क्षति हुई । जिस कड़ी में अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद, बाड़मेर, पेंशनर समाज, बाड़मेर, बाल साहित्य परिषद, बाड़मेर, राष्ट्रीय कवि संगम, बाड़मेर, युवा साहित्य संस्थान, बाड़मेर, चैपाल साहित्य संस्थान, बाड़मेर, रंगधारा संस्थान, बाड़मेर, मोर्डन आर्ट थियेटर संस्थान, बाड़मेर, चारण साहित्य संस्थान, बाड़मेर, भारती फाउण्डेशन, बाड़मेर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर शाखा बाड़मेर, वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति, बाड़मेर सहित कई संस्थाओं ने वक्र को भावभीनी श्रद्धांजलि दी । और सभा में कई वक्ताओं ने अपने कन्हैयालाल वक्र के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विचार रखे ।

वक्ताओं ने कहा कि कन्हैयालाल वक्र निर्भीक, कर्तव्यनिष्ठ, बात के धनी और सदा स्वाभिमान को जिंदा रखने वाले थे । वे एक अग्रणीय लेखक और साहित्यकार थे उनकी रचनाएं कहीं मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती है तो कहीं शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करती है। उनकी कविताओं, गजलों व आलेखों में सत्ता की पदलोलुपता पर सदा वक्र दृष्टि रही जो सहज ही उनके द्वारा लिखित पुस्तकों में झलकती है। उन्होंने 3 वर्ष तक ‘‘दैनिक प्रतिनिधि’’ समाचार पत्र में राजनीति पर करारें व्यंग्य लेख लिखे । यही नहीं उन्होंने स्थानीय ‘‘दैनिक जनता सहकार’’ में सतोलिया नामक व्यंग्य निरन्तर लिखें। सादा जीवन उच्च विचार के धनी वक्र कवि गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों एवं आकाशवाणी के कार्यक्रमों से वर्षों तक जुड़े रहे ।

श्रद्धांजलि सभा के अन्त में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा के चिरशान्ति की कामना की गई । इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्यगण और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे । तत्पश्चात विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उनके निवास पहुंच शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और उन्हें ढ़ाढ़स बंधाया ।