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विश्व विख्यात करणी माता का मंदिर देशनोक

देश का एकमात्र करणीमाता का मंदिर जहां 20 हजार चूहे माता के भक्त हैं, यहां सफेद चूहे भी हैं जिनके दर्शन को शुभ माना जाता है*
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यहां रहने वाले चूहों को काबा कहा जाता है, श्रद्धालु मां करणी के साथ-साथ इन चूहों के भी प्रसाद चढ़ाते हैं !
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✍🏼तिलक माथुर
केकड़ी_राजस्थान
मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना के बीच आपको चूहों वाली देवी के बारे में जानना है तो राजस्थान के बीकानेर जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित देशनोक कस्बे में जाईए। देशनोक में विश्व प्रसिद्ध देशनोक करणी माता का मंदिर स्थित है। नवरात्रि 2019 के मौके पर यहां पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ा हुआ है। श्रद्धालु मां के दरबार में धोक लगाने पहुंच रहे हैं।

देशनोक करणी माता का मंदिर संभवतया देश का ऐसा इकलौता मंदिर है जहां पर करीब 20 हजार चूहे भी रहते हैं। ऐसे में मंदिर को चूहों वाली देवी का मंदिर कहा जाता है। यहां सफेद चूहे भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जिन्हें मां करणी का वाहक माना है। उल्लेखनीय है कि देशनोक करण माता मंदिर के सफेद चूहों को लेकर श्रद्धालुओं में बड़ी आस्था है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में सफेद चूहों के दर्शन को शुभ मानते है। इस मंदिर के चूहों की एक विशेषता और भी है कि मंदिर में सुबह ओर शाम होने वाली आरती के दौरान बड़ी संख्या में चूहे मंदिर परिसर में दिखाई देते हैं। यहां रहने वाले चूहों को काबा कहा जाता है।

श्रद्धालु मां करणी के साथ-साथ इन चूहों के भी प्रसाद चढ़ाते हैं। करणी माता मंदिर का इतिहास देशनोक की करणी माता बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं। करणी माता के वर्तमान मंदिर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। इस मंदिर में चूहों के अलावा संगमरमर के मुख्य द्वार पर की गई उत्कृष्ट कारीगरी, मुख्य द्वार पर लगे चांदी के बड़े-बड़े किवाड़, माता के सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए रखी चांदी की बहुत बड़ी परात भी मुख्य आकर्षण है। श्रद्धालुओं का मत है कि करणी देवी साक्षात मां जगदम्बा की अवतार थीं। अब से लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व जिस स्थान पर यह भव्य मंदिर है, वहां एक गुफा में रहकर मां अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना किया करती थीं। यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है।

मां के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी इच्छानुसार उनकी मूर्ति की इस गुफा में स्थापना की गई। बताते हैं कि मां करणी के आशीर्वाद से ही बीकानेर और जोधपुर राज्य की स्थापना हुई थी। गौरतलब है कि संगमरमर से बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। मुख्य दरवाजा पार कर मंदिर के अंदर पहुंचते ही चूहों की धमाचौकड़ी देख मन दंग रह जाता है। चूहों की बहुतायत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैदल चलने के लिए अपना अगला कदम उठाकर नहीं, बल्कि जमीन पर घसीटते हुए आगे रखना होता है। लोग इसी तरह कदमों को घसीटते हुए करणी मां की मूर्ति के सामने पहुंचते हैं।