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शिक्षा, संस्कार और रोजगार विफ़ा के मुख्य उद्देश्य : सुशील ओझा

कला, धर्म, साहित्य और रंगकर्मियों के लिए बीकानेर में स्थापित होगा विफ़ा का अनूठा केंद्र

नेपाल, भूटान, अमेरिका के हॉस्टन शहर के बाद अब दुबई में स्थापित होगी विफ़ा की शाखा

बीकानेर। ब्राह्मण समाज के युवाओं में शिक्षा, संस्कार और रोजगार को मुख्य ध्येय बनाकर विप्र फाउंडेशन (विफा) तन्मयता से क्रियाशील होकर सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है। राजस्थान और हरियाणा मूल के ब्राह्मणों के एकमात्र वैश्विक संगठन विप्र फाउंडेशन में एकरूपता के साथ कार्य करते हुए वर्ष 2009 में जिन उद्देश्यों को लेकर कार्य आरंभ किया था, इस एक दशाब्दी में विजन 2020 डॉक्यूमेंट को शत-प्रतिशत प्राप्त कर लिया है।

यह कहा विप्र फाउंडेशन के संस्थापक-संयोजक सुशील ओझा ने। बीकानेर मूल के कोलकाता में प्रवासित ओझा जड़ से जुड़े रहने के संकल्प के तहत दीपोत्सव पर्व पर पहली बार अपने बुजुर्ग माता-पिता व परिवार जनों के साथ 5 दिनों के लिए बीकानेर में यहां की माटी व लोगों में रच-बसकर दीपावली मनाने आए थे। एक खास बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में विप्र फाउंडेशन 3 जोन (जोन एक-जयपुर, जोन 1 ए-उदयपुर व जोन 1बी-बीकानेर) कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर में शिक्षा के क्षेत्र में सेंटर फॉर एक्सीलेंस (प्रज्ञा केंद्र) का निर्माण इसी वर्ष में प्रारंभ हो जाएगा। इसके लिए 70 हजार वर्ग फीट भूमि मानसरोवर क्षेत्र में क्रय की जा चुकी है, यहां कन्या छात्रावास, वैदिक रिसर्च व स्किल डेवलपमेंट की दिशा में प्रशासनिक सेवाओं के लिए अध्ययनरत होनहारों को कोचिंग प्रदान की जाएगी। वहीं उदयपुर में विप्र लेकसिटी कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज भी अगले सत्र से प्रारंभ होगा।

ओझा ने बीकानेर के परिपेक्ष में कहा कि छोटीकाशी नाम से मशहूर बीकानेर देश और दुनिया का ऐसा शहर है जिसने कला, धर्म, रंगकर्म एवं साहित्य के क्षेत्र में अपनी वैशिष्टता का लोहा मनवाया है, हम उन्ही की स्मृतियों को संजोते हुए युवा पीढ़ी को इस दिशा में प्रेरित और सहयोग करने की श्रृंखला में एक अनूठे केंद्र की स्थापना अगले वर्ष करेंगे जहां रंगकर्मियों, साहित्यकारों एवं नाटककारों को उचित प्लेटफार्म मिल सकेगा। शिक्षा-साहित्य, संस्कार और रोजगार मुख्य रूप से फोकस में रखते हुए कार्य कर रहे विप्र फाउंडेशन ने दशाब्दी वर्ष में लिए अनेक संकल्पों की कड़ी में सीखो कमाओ योजनान्तर्गत 1700 युवा ई-कॉमर्सशिप कर नौकरियों के क्षेत्र में अग्रसर हुए हैं।

विफ़ा में ब्याज रहित ऋण योजना के माध्यम से 270 युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सफल बनाया है। सारथी कैरियर काउंसलिंग के माध्यम से लगभग 12000 युवा लाभान्वित हुए हैं। ओझा ने बताया कि मात्र इसी वर्ष ही 7000 युवाओं को प्रतिभा पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में कोलकाता व सूरत में विफ़ा के स्थानीय केंद्रों का निर्माण व संचालन भी आरंभ हो चुका है। विप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (वीसीसीआई) एप्प के माध्यम से हजारों लोग रोजगार सृजन व प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होते हुए सफल हुए हैं। सुशील ओझा ने कहा कि संगठन की 10 वर्षों की निरंतरता भरी यात्रा में समाज में एक विशिष्ट पहचान के साथ विश्वास की प्रतिष्ठा भी कायम हुई है। उन्होंने बताया की विप्र फाउंडेशन देश की सीमाएं लांघकर नेपाल, भूटान के बाद अमेरिका के होस्टन शहर में अपनी शाखाएं स्थापित कर चुका है। शीघ्र ही दुबई की शाखा भी प्रारंभ होगी।

संगठन की इन अंतरराष्ट्रीय शाखाओं के माध्यम से विदेशों में युवाओं को अध्ययन एवं नौकरियों के क्षेत्र में कार्य करने के लिए स्वधर्मी लोगों के परस्पर समन्वय सहयोग का योगदान प्राप्त होगा। ब्राम्हणों के पिछड़ेपन सरीखे एक प्रश्न के उत्तर में ओझा ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष में ब्राह्मणों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि वर्षो से देश में कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए जातिवाद के नाम पर जहर घोल रहे हैं। ऐसे में समरसता के आधार पर सबकी भलाई सोचने वाला ब्राह्मण जब तक प्रखर भूमिका में नेतृत्व नहीं करेगा, तब तक इस दर्द से मुक्ति नहीं मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे युवा जब शिक्षावान-संस्कारवान होंगे तभी पिछड़ेपन से मुक्ति मिलेगी चाहे वह आर्थिक हो या वैचारिक। विफ़ा के कर्णधार सुशील ओझा ने कहा कि भारत फिर से विश्वगुरु बने यह तभी संभव है जब भारत के सभी समाज तेजस्वी और ओजस्वी होंगे।