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सरकार युवाओं को नशे के जाल में फंसने से बचाए-दीपेंद्र हुड्डा

·प्रदेश में नशे का कारोबार बढ़ रहा और सरकार गहरी नींद में सो रही है
·बेरोजगारी, खराब अर्थव्यवस्था इसके मुख्य कारण
अनूप कुमार सैनी
रोहतक, 16 जनवरी। सीडब्ल्यूसी सदस्य एवं पूर्व सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज रोहतक के कई सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत की और लोगों से मुलाकात की। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार की खराब आर्थिक नीतियों के कारण देश दिवालेपन की कगार पर पहुंच गया है, सारे उद्योग-धंधे चौपट हो गए और बेरोजगार युवा नशे के जाल में फंसकर अपना और अपने परिवार का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशे का कारोबार बढ़ रहा और सरकार गहरी नींद में सो रही है। जो प्रदेश खेल-खिलाड़ियों और प्रति व्यक्ति आय व निवेश के मामले में पूरे देश में अग्रणी हुआ करता था, आज वो हरियाणा दुर्भाग्य से नशे और बेरोज़गारी के मामले में देश में सबसे आगे पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को नशे के जाल में फंसने से बचाए।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि उन्हें एनसीआरबी की रिपोर्ट देखकर बड़ा दुःख हुआ, जिसमें यह दर्शाया गया है कि नशे के मामले में हरियाणा अपने पड़ोसी राज्य पंजाब को पीछे छोड़ चुका है। उन्होंने बताया कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने एक आदर्श खेल नीति बनाई थी। इसके तहत खिलाड़ियों को पद, प्रतिष्ठा और पैसा तो मिलता ही था, साथ ही गांव-गांव में मौजूद खेल प्रतिभाओं को पनपने का मौका भी मिलता था।

पूर्व सांसद ने कहा कि हर किसी में बेहतरीन खिलाड़ी बनने की होड़ लगी रहती थी। इसके लिए गांव-गांव में स्टेडियम बनाए गए और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराई गई। इस खेल नीति ने प्रदेश के नौजवानों को नशे जैसी सामाजिक बुराईयों में फंसने की बजाय खेल प्रतिभा निखारने की ओर मोड़ दिया था।
उनका कहना था कि खेल का मैदान युवाओं को अपराध जगत की और रुख करने से भी रोकता है। आज बदहाल अर्थव्यवस्था और लचर खेल नीति ने युवाओं को खाली बैठने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे युवाओं को शातिर ड्रग माफिया नशे की गिरफ्त में लेकर अपराध जगत की ओर ढकेलने में कामयाब हो रहे हैं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने आगे कहा कि सुबह और शाम के समय सैंकड़ों नौजवान खेल के मैदानों में पसीना बहाते दिखायी देते थे और यह नजारा देखते ही बनता था लेकिन दुःख की बात है कि आज ऐसा देखने को नहीं मिलता। सरकार खेल-खिलाड़ियों के प्रति उदासीन रवैया अपनाये हुए है और उनका तिरस्कार कर रही है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई सम्मान समारोह आयोजित नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि सालों साल तक उनको ईनाम की राशि का वितरण भी नहीं होता। परिणामस्वरूप जहां 2012 के ओलंपिक खेलों में भारत को 6 मेडल मिले थे, जिनमें 4 पदक विजेताओं का संबंध हरियाणा से था। वहीं भाजपा सरकार आने के बाद 2016 के ओलंपिक खेलों में 130 करोड़ की आबादी वाले देश को केवल 2 मेडल ही मिले, जिसमें 1 पदक विजेता का संबंध हरियाणा से था। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपील करी कि वे खुद को नशे से दूर रखें और इस बारे में अपने साथ के लोगों को भी जागरुक करें।
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