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सामयिक से धार्मिक आत्म गुणों का विकास-साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.

बीकानेर, 20 अक्टूबर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वर म.सा. के ’’सूुरि मंत्रा’’ साधना की चतुर्थ एवं पंचम पीठिका की पूर्णाहुति पर रविवार को बागड़ी मोहल्ले की ढढ्ढा कोटड़ी में प्रवर्तिनी साध्वी शशि प्रभा म.सा. के सान्निध्य में सामूहिक सामयिक साधना दिवस मनाया गया। अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने आत्म चिंतन व मंथन करते हुए पापों की आलोचना।

अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा एवं महिला परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अनेक श्रावक-श्राविकाएं सफेद वस्त्रों में समता और समभाव की साधना 48 मिनट व उससे अधिक समय तक की। साध्वीश्री शशि प्रभाजी.मसा ने कहा कि सामयिक मन को स्थिर रखने की अपूर्व क्रिया है, आत्मिक अपूर्व शांति प्राप्त करने का संकल्प,परम पद पाने का सरल और सुखद मार्ग है। सामयिक अखंडानंद प्राप्त करने का गुप्त मंत्र, दुख व पापों से निवृति का प्रमुख मार्ग है। सामयिक में आत्मा को परमात्मा बनाने मा सामथ्र्य है। सामयिक से आत्मा में रहे दुर्गण नष्ट होकर सद्गुण प्राप्त होते है तथा परम शांति की अनुभूति होती है।

उन्होंने कहा कि सामयिक से धार्मिक आत्म गुणों का विकास होता है, इसमें अशुभ तथा अशुद्ध क्रियाओं के वर्जन और शुभ शुद्ध क्रियाओं के सेवन का शिक्षण व अभ्यास किया जाता है। सामयिक धार्मिक आध्यात्मिक व्यायामशाला के समान है जिसमें आत्मा भाव व्यायाम करके अपने सद्गुणों को पुष्ट करता है। उन्होंने कहा कि सामयिक वस्तुतः साधुत्व का पूर्वाभ्यास है। आत्मा को परमात्मा स्वरूप् में रूपांन्तरण की प्रक्रिया साधुत्व है।

साध्वीश्री के सान्निध्य में 23 अक्टूबर को वैदों के महावीरजी के मंदिर में दुर्लभ व अति प्राचीन प्रतिमाओं का 18 अभिषेक, 24 से 26 अक्टूबर तक ढढ्ढा कोटड़ी में बच्चों का संस्कार जागरण शिविर तथा 26 से 28 अक्टूबर तक नवग्रह का विशेष जाप होगा। बच्चों का संस्कार जागरण शिविर सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक चलेगा इसमें 8 से 25 वर्ष तक के बालक-बालिकाएं,किशोर व किशोरियां हिस्सा लें सकेंगी।