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सामुहिक सामायिक का हुआ आयोजन (चन्द्रप्रकाश बी. छाजेड़)

बाड़मेर, 06 नवम्बर। प.पू. गणाधीश पन्यास प्रवर विनयकुशलमुनिजी म.सा. की निश्रा में स्थानीय आराधना भवन में सामुहिक सामायिक का आयोजन किया गया।
खरतरगच्छ चातुर्मास समिति, बाडमेर के मिडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश छाजेड़ ने बताया कि परम पूज्य खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वर महाराज साहब की सूरि मंत्र की पंचम पीठिका की पूर्णाहुति पर बाड़मेर नगर में आराधना भवन में दोपहर में 2 बजे सामुहिक सामायिक आयोजन गुरूभक्त परिवार द्वारा किया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में पुरूषों व महिलाओं व बच्चों ने भाग लेकर 48 मिनट तक सामायिक व्रत ग्रहण किया।

इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणाधीश विनयकुशलमुनिजी म.सा. ने कहा कि बूँद-बूँद से घड़ा भरने के समान एक सामायिक प्रतिदिन करने वालों की एक महीने में, एक अहोरात्रि और बारह महीने में बारह अहोरात्रि (दिन-रात) धर्म ध्यान में व्यतीत होती है। ऐसे 30 वर्ष में 360 दिन-रात आराधनामय हो जाते हैं। एक सामायिक का फल बानवे करोड़ उनसाठ लाख, पच्चीस हजार, नौ सौ पच्चीस पल्योपम से अधिक नारकी का आयुष्य क्षयकर देवता का अधिक शुभ आयुष्य उपार्जन होता है। एक शुद्ध सामायिक की दलाली सात स्वर्ण मेरु से बढ़कर है। राजा श्रेणिक ने, भगवान महावीर से एक सामायिक का मूल्य पूछा, तो भगवान ने उत्तर दिया- ‘हे राजन् ! तुम्हारे पास जो चाँदी, सोना व जवाहर राशि हैं, उनकी थैलियों को ढेर यदि सूर्य और चाँद को छू जाएँ, फिर भी एक सामायिक का मूल्य तो क्या, उसकी दलाली भी पर्याप्त नहीं होगी।

हमने अपने जीवन में पुणिया श्रावक से भी अधिक सामायिक कर ली लेकिन हमारा नाम अभी तक हमारा नाम महापुरूषों की लिस्ट में नही आया आज भी हम पुणिया श्रावक की सामायिक को याद करते है लेकिन हमारी सामायिक को कोई याद नही करता है। समता शब्द को उल्टा पढ़ने से तामस पढ़ा जाता है जब तक हमारे जीवन में समता नही है तब तक हमारा जीवन तामस अर्थात् अंधकारमय है। सामायिक पूर्णाहुति के उपरांत गुरू भक्त परिवार द्वारा प्रभावना की गई तथा अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासंघ युवा शाखा बाड़मेर-सूरत द्वारा 9 लक्की ड्रा निकाले गए।