– पीड़ित से कागजों पर अंगूठा लगवा कर किया बच्चा वापस

– बच्चे को खरीदने वाले के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई

आगरा। कहने को तो डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन कलयुग के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर ने तो हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया रिक्शा चलाकर पेट पालने वाले रिक्शा चालक के बेटे को हॉस्पिटल का खर्च ना चुकाने पर अपने रिश्तेदार को बच्चा बेचकर डॉक्टरी पेशे को शर्मसार कर दिया मामला जब मीडिया की सुर्खियां बना तो आगरा प्रशासन और पुलिस सतर्क हुई और आनन-फानन में हॉस्पिटल संचालक पर दबाव डालकर बच्चा दंपति को सौंपा मामला थाना एत्माद्दौला मैं जहां हॉस्पिटल का बिल जमा न करने पर गरीब की मजबूरी का फायदा उठाकर उसका बच्चा बेचने का मामला सुर्खियां बना तो पुलिस व प्रशासन को कार्यवाही करनी पड़ी जिससे पीड़ित दंपत्ति को उसका नवजात शिशु वापस मिल गया। नवजात शिशु के वापस मिलने से पीड़ित दंपत्ति काफी खुश नजर आए और उसने अपने बच्चे को कलेजे से लगाकर सभी मददगारों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

मामला थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के शंभू नगर का है। शंभु नगर निवासी राम चरण ने विगत 24 अगस्त को ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित जेपी हॉस्पिटल में अपनी पत्नी का प्रसव कराया था। प्रसव के दौरान बेटे का जन्म हुआ। आपरेशन का खर्च लगभग 30 हजार आया। वह इलाज का खर्च नहीं दे पाया तो डॉक्टर ने कहां कि इस बच्चे को किसी और को बेच दो इससे और पैसे मिल जाएंगे। डॉक्टर ने उस बच्चे का एक लाख रुपये में सौदा कर दिया। तीस हजार रुपये काटकर परिवार को सत्तर हजार रुपए दे दिए।
मजबूरी में परिवार अपने घर आ गया और चिकित्सकों से भी कुछ नही कह पाया। जब यह मामला सुर्खियों में आया तो प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। अस्पताल को सील कर दिया गया। सीओ छत्ता और एसीएम द्वितीय ने पीड़ित परिवार के घर जाकर मुलाकात की। रात 11 बजे पुलिस पीड़ित परिवार थाने ले आई और बच्चे को खरीदने वाले व्यक्ति को बुलाकर बच्चा पीड़ित दंपत्ति को वापस दिलाया।
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने इस मामले में डीएम, बाल आयोग, सीएमओ और मानव तस्करी निरोधक शाखा को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग की थी। उन्होंने कहा के गोद देने के लिए देश में केंद्रीय दत्तक ग्रहण इकाई कारा काम करती है। उसी के माध्यम से बच्चों को गोद दिया जाता ह,ै अस्पताल प्रशासन द्वारा गोद दिलाया गया यह बच्चा अवैध है पूरी गोद की प्रक्रिया अवैध है। यह बाल तस्करी के दायरे में आता है। बच्चों के सौदागरों के विरुद्ध मानव तस्करी की धारा 370 के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि अस्पताल द्वारा कई अन्य बच्चों की भी खरीद-फरोख्त की गई होगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जेपी हॉस्पिटल के अलावा शहर के अन्य अस्पतालों की भी कुंडली खोली जाए। जिससे बच्चों को गोद के नाम पर बेचे जाने का मामला खुल सके। उन्होंने कहा है की यहां बच्चा बेचने का गैंग भी सक्रिय हो सकता है। इस मामले को प्रशासन तथा पुलिस को गंभीरता से लेना चाहिए।

चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस व प्रशासन ने निजी हॉस्पिटल संचालक चिकित्सक पर दबाब बनाया और फिर रात में बच्चे खरीदने वाले को थाने बुलाया गया। पुलिस देररात पीड़ित दंपत्ति को भी थाने लाई और कुछ कागजों पर कार्यवाही कराकर बच्चा दंपत्ति को सौंप दिया गया। यह पूरी कार्यवाही एक वकील की मौजूदगी में हुई।
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस का कहना है कि पुलीस ने इस मामले मे चिकित्सक के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की है और जिस तरह से रात में इस पूरी कार्यवाही में कानूनी प्रक्रिया अपना कर, पीड़ित से कागजों पर अंगूठा लगवाकर बच्चा वापस दिया है उससे साफ है कि बच्चे को खरीदने वाले के खिलाफ भी कोई कार्यवाही नही होगी।