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धूमधाम से मनाया गया 70वां राजस्थान दिवस

OmExpress News / जयपुर / 70वां राजस्थान दिवस शनिवार को पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों से राजस्थान दिवस मनाया गया। राजस्थान दिवस हर साल 30 मार्च को मनाया जाता है। 30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था। यही राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। 70th Rajasthan Divas

राजस्थान रत्न अवॉर्ड’ फिर से किया जाएगा शुरू 

राजस्थान दिवस के अवसर पर बिडला सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान के समाजसेवियों, प्रबुद्धजनों को सम्मानित करने के लिए ‘राजस्थान रत्न अवॉर्ड’ फिर से शुरू किया जाएगा । हमारी सरकार कार्यकाल में यह पुरस्कार देकर समाज की हस्तियों को सम्मानित करती थी। लेकिन, भाजपा सरकार ने इसे बंद कर दिया। अब यह पुरस्कार फिर से दिया जाएगा। 70th Rajasthan Divas

 

मुख्यमंत्री गहलोत शनिवार को राजस्थान दिवस के अवसर पर बिडला सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। काव्या फाउंडेशन, स्वच्छ नगर संस्था की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के समय राजस्थान में कुछ भी नहीं था। 70 वर्षों में यहां जो भी सरकारें आई, मुख्यमंत्री आए, उन्होंने अपना योगदान दिया। तभी आज प्रदेश इस मुकाम पर खड़ा है। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया।

पर्यटकों का पारम्परिक तिलक लगाकर किया गया स्वागत 

राजस्थान दिवस के अवसर पर हवामहल स्मारक के मुख्य प्रवेश द्वार पर रंगोली बनवायी गई और पर्यटकों का पारम्परिक तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा एवं स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति राजस्थान दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार के पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा प्रदेश के सभी राजकीय संग्रहालयों एवं संरक्षित स्मारकों में देशी-विदेशी पर्यटकों का प्रवेश निःशुल्क दिया गया। 70th Rajasthan Divas

बदलाव बिना उन्नति नहीं, बहुत कुछ करना बाकी : अरविन्द सिंह मेवाड़

harish guptaमेवाड़ से लेकर उदयपुर और अब स्मार्ट सिटी के साक्षी रहे हैं अरविन्द सिंह मेवाड़। राजस्थान निर्माण की प्रक्रिया में मेवाड़ का योगदान। उसके बाद के बदलाव। कमियों और सुधार के तरीकों पर सिंह ने रखी अपनी बात। जानिए उनकी खुद की जुबानी

‘आजादी के एक दशक बाद जब राजस्थान निर्माण की प्रक्रिया पूर्ण हुई। इसके बाद भी राजस्थान का विकास यहां की झीलों, पहाड़ों, रेगिस्तान, विविधता वाली प्रकृति के आधार पर होता रहा है। यहां का इतिहास समृद्धशाली रहा है। वर्तमान में राजस्थान के विकास के लिए किए जा रहे प्रयास काफ ी नहीं हैं, हम आज भी अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पीछे हैं।

इसका कारण हम केवल सरकार को नहीं बता सकते बल्कि राजस्थान के प्रत्येक नागरिक को एक समृद्ध राजस्थान बनाने की ओर सोचना चाहिए और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

 

उदयपुर झीलों की नगरी होने के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पर्यटक यहां घूमने आते हैं। वे यहां की संस्कृति और जीवंत विरासत से अभिभूत होकर लौटते हैं लेकिन उनकी यहां की यात्राओं के दौरान कई बार असुविधाएं होती हैं जो शायद इस 21वीं सदी में नहीं होनी चाहिए। विकास के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को भी ओर मजबूत करने की आवश्यकता है। राजस्थान में उन्नति के लिए और भी बदलाव लाने आवश्यक हैं। चाहे वे सरकारी प्रयास हों, चाहे संस्थाओं के प्रयास हों या चाहे नागरिकों के प्रयास हों। बदलाव बगैर उन्नति सम्भव नहीं।’