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आह… खिल खिलाती मौत आई रे : रामेश्वर

राजस्थानी भाषा को समर्पित रही राष्ट्रीय कवि चौपाल की 193 वीं कड़ी

बीकानेर। स्वास्थ्य एवं साहित्स संगम के राष्ट्रीय कवि चौपाल की 193 वीं कड़ी पंचवटी भ्रमण पथ, राजीव गांधी मार्ग रविवार आज 3 मार्च 2019 को सुबह बड़ी मात्रा में उपस्थित श्रोताओं एवं कवियों ने अपनी प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय कवि चौपाल के सचिव डॉ. कवि तुलसीराम मोदी ने बताया कि कार्यक्रम अध्यक्षता सरदार अली परिहार व मुख्य अतिथि देवीशरण शर्मा व विशिष्ट अतिथि राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व कार्यवाहक उपसचिव कवि तुलसीराम मोदी एवं राष्ट्रीय कवि चौपाल के संस्थापक कवि व समाज सेवी नेमचंद गहलोत मंच पर शोभित हुए।

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राष्ट्रीय कवि चौपाल के सचिव डॉ. तुलसीराम मोदी ने बताया की कार्यक्रम का शुभारम्भ कवित्री श्रीमती मधुरिमा सिहं ने सरस्वती वन्दना से कि, कवि चौपाल के संस्थापक कवि समाज सेवी नेमचंद गहलोत ने मित्रता में शीध्रता मत करो।
राष्ट्रीय कवि चौपाल के अध्यक्ष रामेश्वर बाड़मेरा ”साधकÓÓ ने आह… खिल खिलाती मौत आई रे।
कवि संत किशननाथ खरपतवार ने मन मन में ही खाओ लाड्डू।
चौपाल के सचिव डा. तुलसीराम मोदी ने कदई किणी रा सुपना दुजैडे री आंख्या सूं नी दीसे।
रंगकर्मी कवि बी.एल. नवीन ने देशभक्ति गीत सुनाया।
शिवप्रकाश ने शहीदों से पुछकर देखो।
कवि डॉ. महेश चुग ने नींद क्यों रात भर फिर आती नहीं।
शहबाज हसन ने कुदरत के सभी खूबसूरत नजारे देखे है।
माजीद खान ने मै ये काम सुबह शाम करता हूं।
श्रीमती मधुरिमा सिंह ने अभिनंदन को अभिनंदन।
डॉ. कृष्णा वर्मा ने जिन्दे थे समुद्र ने छोडा नहीं।
प्रकाश चंद वर्मा ने साथी हाथ बढाना गीत सुनाया।
लीलाधर सोनी ने सुनो सुनो रे दुनिया वासी सच्चा आंतकी कौन है।
फजल मोहम्मद ने ये कडा वक्त भी रोज गुजर जायेगा।
महबूब अली ने उंचा रहेगा तिरंगा झण्डा ये हमारी शान है। मिराजुदीन ने हो जायेगा नदियों का बंद पानी।
राजू लखैटिया ने बांसुरी की धुन पर छुप छुप के छलिये वादन किया।
अजीतराज ने मैं जानता हूं मेरा पड़ौसी।
बाबूलाल छंगाणी ने वारी जाउं से भारत देश रे वीर सुपाता रे। कैलाश टाक ने क्यों मिले अब दिलों से दिल, दिलों में मिली जितनी दुरी है।

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मंच संचालन हास्य कवि बाबुलाल छंगाणी व कैलाश टाक ने किया। कार्यक्रम में जब्बार बीकाणवी, रामेश्वर सोनी, बाबुलाल भाटी, अखतर हुसैन, श्रीगोपाल स्वर्णकार, हनुमान कच्छावा, रामदेव आसौपा, जगन्नाथ, हबिब अहम खां, ओमप्रकाश भाटी, चन्द्रप्रकाश ओझा, इशरार हसन कादरी, रफीक अहमद, घनश्याम मोदी अन्य कवि श्रोतागण कार्यक्रम में उपस्थित हुए।