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बीकानेर थियेटर फेस्टिवल: तीसरे दिन भी रंगकर्मियों द्वारा अभिनय से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

बीकानेर। बीकानेर थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन हंसा गेस्ट हाउस ऑडोटोरियम में डॉ नन्दकिशोर आचार्य और अभिनेता के मध्य संवाद हुआ। संवाद सूत्र मालचंद तिवाड़ी थे। वही जयरूप जीवन को निर्मोही सम्मान से सम्मानित किया गया। जीवन को सम्मान पत्र, शॉल और 11 हज़ार रुपये सम्मान स्वरुप आर्पित किया गया। शनिवार को पहली प्रस्तुति जयरूप जीवन के निर्देशन में नाटक पांचाली का मंचन किया गया। जिसमें मुख्यभूमिका मन्दाकिनी जोशी ने निभाई।

यह नाटक द्रोपदी के प्रतिशोध और उसके द्वंद्व की प्रस्तुति से उबारा गया। महाभारत के समय में महिलाओं के शोषण की स्थितियों का विश्लेषण करने वाले नाटक में मन्दाकिनी ने जीवंत अभिनय की दर्शकों ने भूरी भूरी प्रशंसा की। दूसरी प्रस्तुति टीएम ऑडिटोरियम में सैया भये कोतवाल का कलाकारों द्वारा शानदार प्रदर्शन किया गया। हैदराबाद से आए नाटय दल के निदेशक सौरभ थे। प्रसिद्ध मराठी लोक नाटक ‘विच्छ माजि पूरी काराÓ वंसत सबनीस द्वारा लिखा गया था जिसका हिन्दी अनुवादित उषा बैनर्जी ने किया था। नाटक में थपकी वाली कॉमेडी भाई भतीजावाद की राजनीति अंतधाराओ को सामने लाती हैं।

तीसरी प्रस्तुति जयपुर के तपन भट्ट के निर्देशन में राजपुताना का मंचन रेलवे ऑडिटोरियम में हुवा राजस्थान की पन्नाधाय, हांडी रानी और मीरा की कहानियों के माध्यम से राजस्थान की कला संस्कृति को शानदार अभिनय के साथ दिखाया गया। चोथी प्रस्तुति टाउन हॉल में दिल्ली के जे पी सिंह जयवर्धन के निर्देश में नाटक गोरखधंधा का मंचन किया गया। पांचवी प्रस्तुति रविन्द्र रंग मंच पर अशोक बाठिया के निर्देशन में नाटक कृष्णा – लवर एन्ड वारियर का मंचन किया गया।कृष्ण प्रेम और योद्धा भगवान की लीलाओं में कन्हैया के बचपन, राधा कृष्ण की प्रेम गाथा, कंश वध ,शिशुपाल वध, ओर महाकाव्य से पुन: जुड़ाव भी सामिल था।महाभारत के चपल द्र्श्य जिसमें द्रोपदी चीर हरण, गीता उपदेश, अश्वत्थामा श्राप ,गांधारी कृष्ण को श्राप आदि शामिल थे।नाटक में शास्त्रीय संगीत नृत्य गीत और रास की प्रस्तुति हुई।

(विशेष सहयोगी योगेश पुरोहित के साथ ओम दैया)

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