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कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर किसानों का महापड़ाव

कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर किसानों का महापड़ाव
कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर किसानों का महापड़ाव

बीकानेर । सीकर में पिछले एक पखवाड़े से किसानों का महापड़ाव लगा हुआ है। सोमवार को बीकानेर जिले के हजारों किसान कलेक्ट्रेट पर आकर बैठ गए हैं। सीकर के किसानों की तरह बीकानेर के किसान भी कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। चूंकि बीकानेर में मूंगफली की पैदावार भी अधिक होती है, इसलिए यहां के किसान सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीद की मांग भी कर रहे हैं।

किसानों ने बीकानेर कलैक्ट्री को घेरा

सोमवार को कर्मचारी मैदान में चल रहे किसानों  के महापड़ाव का सब्र का बांध उस समय टूट गया जब चल रही सभा में शामिल होने पहुंचे किसानों ने बीकानेर कलैक्ट्री को घेर लिया और कलेक्ट्रेट परिसर में उन्हें रोकने के लिए बनाए गए बेरिकेड्स को देखा और उलटा-पुलटा कर दिया । किसान नेता गिरधारी महिया के नेतृत्व में रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे आक्रोशित किसानों ने मौके पर रखे बेरिकेड्स फैंक दिए। किसानों ने मौके पर राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। उधर बीकानेर पुलिस प्रशासन ने भी महापड़ाव को देखते हुए चाक-चौबंद व्यवस्था की है। वहीं मंडी के व्यापारियों ने भी किसानों के महापड़ाव को देखते हुए समर्थन कर दिया है साथ ही साथ यह भी ऐलान किया कि अनाज मंडी में जिंसों की बोली नहीं लगेगी। जानकारी में रहे कि महापड़ाव डाले बैठे किसानों ने सोमवार को कलक्टरी में अपनी ताकत दिखायी तो शासन-प्रशासन की हवाईयां उड़ गई। आंदोलन के तहत किसानों ने कलक्टरी का घेराव कर भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज बुलन्द की।

इसी प्रकार चूरू, गंगानगर, जयपुर, नागौर आदि जिलों के किसान भी आंदोलन पर उतारू हैं। हो सकता है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में किसान सड़कों पर आ जाएं। यह माना कि किसान आंदोलन के पीछे राजनीतिक दलों की भूमिका है। लेकिन सवाल उठता है कि वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चल रही भाजपा की सरकार आंदोलनरत किसानों की सुध कब लेगी? दो दिन पहले सीकर के किसानों से संवाद करने के लिए दो मंत्रियों को भेजा गया था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने सिर्फ खानापूर्ति की। सरकार को किसानों की समस्या के समाधान के लिए जो फैसले करने हैं, उस पर अभी तक भी गंभीरता के साथ विचार नहीं हुआ है। पता नहीं सरकार कितना इंतजार करेगी। यदि समय रहते राज्य सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो फिर हालात भी बिगड़ सकते हैं। सीकर के किसानों ने तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करना शुरू कर दिया है।

विधायक मीणा और बेनीवाल ने भी समर्थन किया

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के घोर विरोधी माने जाने वाले विधायक किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल ने भी किसानों के अंदोलन का खुला समर्थन किया है। मीणा का दौसा और बेनीवाल का नागौर जिले में खासा प्रभाव है। सरकार को इन दोनों नेताओं के समर्थन को भी गंभीरता के साथ लेना चाहिए।