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आज के तनाव की स्थिति में गांधीवादी चिंतन ही एकमात्र समाधान है- डॉ नंदकिशोर

जोधपुर – हिंदी विभाग जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर द्वारा एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली द्वारा संपोषित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित “महात्मा गांधी का साहित्य समाज एवं राजनीति पर प्रभाव” एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन केंद्रीय कार्यालय स्थित बृहस्पति भवन सभागार में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर किया। तत्पश्चात विभागाध्यक्ष प्रो. कैलाश कौशल ने सभी का शब्द सुमनो से स्वागत किया। संगोष्ठी संयोजक प्रो. किशोरी लाल रैगर ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक, आलोचक नंदकिशोर आचार्य अपने उद्बोधन में कहा कि गांधी अपनी मूल स्वतंत्रता एवं व्यक्तित्व में जीने की विश्वास पूर्ण संस्कृति का नाम है। उन्होंने कहा कि गांधी का चिंतन बर्बरतापूर्ण तन, मन एवं धन की हिंसा का प्रतिरोध है। गांधी का महज सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, सत्याग्रह में विश्वास ही नहीं करते थे उसमें जीते भी थे इसलिए वह राज्य को शैतान की व्यवस्था कहा। इसलिए वे राज्य विहिन, सेना विहीन समाज की संकल्पना करते थे। उन्होंने आज के युग में जहां सभी जगह सभी तरह का तनाव फेल रहा है, ऐसे में गांधीजी चिंतन ही एकमात्र समाधान है। जिससे हम मानवता को बचा सके।
बीज वक्तव्य देते हुए कला संकाय के अधिष्ठाता व सिंडीकेट सदस्य प्रो. कौशलनाथ उपाध्याय ने कहा कि गांधी हम में आशा, विश्वास एवं संकल्प का संदेश देते हैं। उनका व्यापक रूप से धर्म, समाज एवं राजनीति पर प्रभाव पड़ा।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुलाब सिंह चौहान ने कहा कि गांधी के सत्य का प्रयोग ईश्वरीय सत्य था जिसे उन्होंने व्यवहार रूप में जी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान जोधपुर की अध्यक्ष आशा बोथरा ने कहा कि गांधी मजबूरी का नाम नहीं मजबूती का नाम है। उनके जीवन की सरलता, सादगी, सौम्यता एवं स्वाभिमान जैसे सास्वत तत्व हमें जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. प्रवीण चंद ने दिया।
प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरविंद परिहार ने गांधी वह अंबेडकर के अछूतोद्धार आंदोलन का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कवि व पूर्व न्यायाधीश मुरलीधर वैष्णव ने गांधी विचारों पर प्रकाश डाला। वक्ता के रूप में दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. औतारलाल मीणा व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. कल्पना पुरोहित ने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ श्रवण कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ कुलदीप सिंह मीणा ने किया।

द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार मीणा ने की। इसके मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के वित्त सलाहकार व कवि श्री दशरथ सोलंकी थे। विश्व की प्रसिद्ध कवियत्री डॉ पदमा शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। संचालन डॉ धूल चंद मीणा ने किया इस अवसर पर दो दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने पत्र वाचन किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शायर शीन काफ निजाम, प्रो. सोहन दान चारण, प्रो. के एन. व्यास, प्रो. डीएस खींची, वयोवृद्ध गांधीवादी जुगल किशोर बेड़ा व शहर के अन्य साहित्यकार, विद्वान, शिक्षक उपस्थित रहे ।