Bikaner Rajasthan Slider

सातवें स्वर्णप्राशन दिवस पर 600 से अधिक बच्चों ने गटकी दवा

बीकानेर। पुष्य नक्षत्र के अवसर पर शनिवार को हमारा उन्नति संस्थान और आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान् में संस्कृति आर्य गुरुकुलम्, राजकोट के सहयोग से सातवां स्वर्णप्राशन संस्कार दवा वितरण कार्यक्रम तीन स्थानों पर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक मधुसूदन व्यास ने बताया कि लक्ष्मीनाथ मंदिर के सत्संग भवन में केसरीचंद पुरोहित, पुष्करणा स्टेडियम के पीछे स्थित रूद्र युवा विकास मंच कार्यालय में भुवनेश एवं यशोवर्धिनी पुरोहित तथा गंगाशहर यूको बैंक के सामने जैन मंदिर में गोरधन सारस्वत द्वारा 12 वर्ष आयुवर्ग के छह सौ से अधिक बच्चों को स्वर्णप्राशन की दवाई पिलाई गई।

व्यास ने बताया कि इस दौरान पंचगव्य उत्पादों एवं इसके महत्व की जानकारी दी गई। गौ ग्राम स्वावलम्बन संस्थान की ओर पंचगव्य से निर्मित धूपबत्ती, गोआहार लड्डू, नस्य घी आदि प्रदर्शित किए गए। ‘जहर मुक्त खाद्य उत्पाद एवं हमारी दिनचर्या विषय पर व्याख्यान आयोजित हुआ। उन्होंने बताया कि अब तक आयोजित छह स्वर्णप्राशन दिवसों में लगभग ढाई हजार बच्चों को दवा पिलाई जा चुकी है।

क्या है स्वर्णप्राशन? व्यास ने बताया कि जिस प्रकार टीकाकरण होता है, उसी प्रकार आयुर्वेद में स्वर्णप्राशन होता है। स्वर्ण भस्म को शुद्ध करते हुए देशी गाय के घी, शहद, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा एवं वचा आदि को देशी गाय के दूध के साथ मिलाकर पुष्य नक्षत्र के दौरान लिक्विड बनाया जाता है। पुष्य नक्षत्र के दिन शुरूआत के बाद स्वर्णप्राशन की दो बूंद नियमित रूप से लेने से बच्चों की स्मरण शक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है तथा ऐसे अनेक लाभ होते हैं।

cambridge1