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कला व संस्कृति ही मनुष्य की पहचान : रांका

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ओम एक्सप्रेस न्यूज बीकानेर। हिन्दुस्तान कला, संगीत व संस्कृति से ओतप्रोत देश है। बीकानेर अपनी संस्कृति व कला के लिए पूरे भारत में अपना अलग स्थान रखता है। यह विचार शनिवार सायं रवीन्द्र रंगमंच में आयोजित चार दिवसीय लोकनाट्य उत्सव के समापन समारोह में नगर विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका ने कहे। न्यास अध्यक्ष रांका ने कहा कि कला से मनुष्य की संस्कृति की पहचान होती है, कलाप्रिय व्यक्ति में सादगी व मानवीयता स्वत: ही मौजूद रहती है। नगर विकास न्यास बीकानेर ने कला व संस्कृति के क्षेत्र में भी कई कार्य किए हैं जिसका जीवंत उदाहरण यह रवीन्द्र रंगमंच है साथ ही टाउन हॉल के नवीनीकरण में भी न्यास अपनी पूरी भागीदारी निभा रहा है।

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उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर एवं नगर विकास न्यास बीकानेर के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे इस समारोह में जयपुर के तमाशा की सुरीली प्रस्तुति के साथ, जम्मू कश्मीर के भान पाथेय और महाराष्ट्र के तमाशा की प्रस्तुतियों ने रविन्द्र रंगमंच पर उपस्थित दर्शकों को विभिन्न अंचलों के लोकरस से सराबोर कर दिया।
जयपुर के रंगकर्मी एवं तमाशा कलाकार दिलीप भट्ट के निर्देशन में जयपुर के दल ने जयपुर तमाशा के पारंपरिक आख्यान गोपीचंद भरथरी का भावमय प्रदर्शन किया । इस प्रस्तुति में शास्त्रीय राग रागनियों जौनपुरी, मालकौंस, सिंध काफी, भैरवी पहाड़ी भूपाली पर आधारित गीतों अपनी तान और आलाप से अपना विशेष प्रभाव छोड़ा। गोपीचंद की भूमिका में प्रसिद्ध तमाशा कलाकार दिलीप भट्ट एवं गुरु जालंधर नाथ की भूमिका में डॉ सौरभ भट्ट ने अपनी ओजपूर्ण गायकी और भावनात्मय अभिनय से तमाशा प्रस्तुति को प्रभावी बनाया । गोपीचंद की मां की भूमिका रेणु संध्या एवं बहन की भूमिका कुमकुम एवं रानी की भूमिका सचिन ने की । हारमोनियम पर मथुरेश एवं तबले पर शैलेन्द्र शर्मा थे । तमाशे में दिखाया गया कि गोपीचंद की कम उम्र के कारण, माता के कहने पर गुरु जालंधर नाथ उसे जोग दिलवाते हैं और अमर होने का उपाय बताते है।

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जम्मू कश्मीर से आये दाल ने बशीर अहमद के निर्देशन में अपना पारंपरिक लोक नाट्य भांड पथेर प्रस्तुत किया कश्मीरी भाषा मे प्रस्तुत लोकनाट्य अपनी विशिष्ट नृत्य शैली एवं संवाद अदायगी से अपनी छाप छोडऩे में सफल रहा। प्रस्तुति में 90 वर्ष के कलाकार का शहनाई वादन आकर्षण का केंद्र रहा ।
महाराष्ट्र के तमाशा के प्रख्यात कलाकार प्रकाश खांडके के निर्देशन में महाराष्ट्र से आये दल ने महाराष्ट्र का तमाशा प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने आकर्षक रूप से नाद प्रस्तुति, गणपति गायन एवं मुजरा का प्रस्तिति दी तमाश के बीच बीच मे सौंघडिय़ा के हंसी मजाक और लावणी नृत्य की प्रस्तुतियों ने तमाशा को और रसिक बनाया।
प्रस्तुतियों से पूर्व नगर विकास न्यास बीकानेर की तरफ से उत्तर एवं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान, जगजीत सिंह भाटिया, राजेश बस्सी का सम्मान किया गया एवं बीकानेर रंग जगत की तरफ से नगर विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका और सचिव आर के जायसवाल का सम्मान किया गया। कार्यशाला समन्वयक वासुदेव भट्ट ने विभिन्न अंचलो से आये कलाकारों का आभार व्यक्त किया।