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धर्म में सेवा का कार्य उच्चतम स्तर :  छाजेड़

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ओम एक्सप्रेस न्यूज गंगाशहर। शासनश्री साध्वीश्री प्रकाशवतीजी सेवाभावी मधुर भाषिनी एवं संघनिष्ठ थीं। संथारा सम्पन्नता के बाद गंगााहर तेरापंथी सभा द्वारा शान्ति निकेतन में आयोजित गुणानुगुणवाद सभा में यह बात वक्ताओं ने कही। केन्द्र व्यवस्थापिका शासनश्री साध्वीश्री गुणमालाजी ने कहा कि साध्वीश्री प्रकाशवती को आचार्य तुलसी ने आषाढ़ कृष्णा दसमी वि.सं. 2010 में दीक्षित किया। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी की मातुश्री साध्वी वंदनाजी की दस वर्षों तक सेवा करके पुण्य अर्जित किया। साध्वीश्री ने कहा कि साध्वी प्रकाशवतीजी के सेवाभावी, विनम्र, सहनशील, मिलनसार, कर्मठ व समर्पित साध्वी के गुणों का अनुसरण करने की प्रेरणा दी।
सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वीश्री कमलप्रभाजी ने कहा कि आपकी कला कुशलता, प्रवचन शैली, संघनिष्ठा, श्रम व स्वाध्यायशीलता सराहनीय है। कमलप्रभाजी ने बताया कि आपके विशिष्ट गणों का मूल्यांकन करते हुए महातपस्वी आचार्य महाश्रमणजी ने आपको 2017 में ‘शासनश्रीÓ सम्बोधन से सम्बोधित किया।

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उनकी सेवा में अपना जीवन अर्पित करने वाली साध्वीश्री दीपमाला ने कहा कि मुझे तो अंगुली पकड़कर चलना साध्वी प्रकाशवतीजी ने सिखाया। उन्होने कहा कि मझे आध्यात्म के क ख ग भी उन्होंने सिखाया। 39 वर्षों से उनके साथ रहकर अपने जीवन को सार्थक बनाया व उनके अंत:कृतज्ञ हूं। संथारा साधना में आध्यात्मिक सहयोग का आचार्यश्री ने अवसर प्रदान किया।
सभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि तेरापंथ धर्म में सेवा का कार्य उच्चतम स्तर का होता है। शासनश्री साध्वी प्रकाशवतीजी ने अपने जीवन में वर्षों तक सेवा प्रदान की। उनकी सेवा में साध्वी दीपमालाजी ने एक कीर्तिमान स्थापित किया है तो तेरापंथ के इतिहास में स्मरणीय रहेगा। छाजेड़ ने कहा कि आमरण संथारा स्वीकार करके जैन संस्कृति को पुष्ट करते हुए अद्भुत साहस का परिचय साध्वी प्रकाशवतीजी ने दिया।
उनके संसारपक्षीय भाई सुरेन्द्र जैन एवं उपासिका निर्मला जैन ने उनका जीवन परिचय एवं संयम पर्याय जीवन को व्याखित करते हुए कुल का नाम रोशन करने की बात कही।

तेरापंथी सभा के मंत्री अमरचन्द सोनी ने सेवा केन्द्र की सभी साध्वियों द्वारा एवं उनकी सहयोगी साध्वीश्री दीपमालाजी द्वारा अन्तिम समय तक आध्यात्मिक सहयोग देने एवं सेवा करने के लिए साधुवाद देते हुए भूरी-भूरी प्रशंसा की। सोनी ने कहा कि तेरापंथ समाज की सभी संस्थाओं ने अपने दायित्व को बखूबी निभाया। गुणानुवाद सभा में साध्वीश्री सोमयशाजी, साध्वीश्री विशदप्रज्ञाजी, समणी उन्नतप्रज्ञाजी, बीकानेर लालकोठी में प्रवासित मेणयशाजी की सहवर्ती साध्वी गौरवप्रभाजी ने भी साध्वी प्रकाशवतीजी के गुणों को जीवन में स्वीकार करने की बात कहते हुए उनके साथ के अनुभव सुनाये। तेरापंथ महिला मण्डल से संजू लालाणी, तेयुप के ललित राखेचा, अणुव्रत महासमिति के प्रकाश भंसाली, डॉ. सुभाष जैन, प्रो. धनपत रामपुरिया, राजेन्द्र सेठिया ने अपनी भावव्यक्ति करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। डाकलिया बन्धुओं एवं सेवाकेन्द्र की साध्वियों ने गीतिका के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किये। संचालन किसन बैद ने किया।

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