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रंगारंग कार्यक्रमो के साथ पुष्कर मेले का सपापन

दो लाख से अधिक श्रदालुओ ने किया महास्नान

पुष्कर….(अनिल सर) अंतराष्ट्रीय पुष्कर मेले का पूर्णिमा महास्नान और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया । कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लाखों श्रदालुओं ने पवित्र पुष्कर सरोवर मे आस्था की डूबकी लगाकर धर्म लाभ प्राप्त किया । जैसे जैसे पूर्णिमा का समय करीब आया लोगों का हुजूम पुJष्कर की तरफ उमडऩे लगा ।खबर लिखे जाने तक दो लाख से अधिक श्रदालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे और लोगो का लगातार आना जारी था । पुष्कर सरोवर के मुख्य घाटों पर श्रदालुओं ने देर रात से ही श्रदालुओ ने डेरा लगाना शुरू कर दिया था रात भर भजन कीर्तन ओर सत्संग के दौर चलते रहे । जैसे ही हिन्दू पंचाग के अनुसार पूर्णिमा का आगमन हुआ , लोगों ने सरोवर मे स्नान कर पुन्य प्राप्त करना शुरू कर दिया । ऐसा माना जाता है की स्रष्टि के रचियता जगत -पिता ब्रह्मा ने इस पवित्र सरोवर के बीच माता गायत्री के साथ कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक यज्ञ किया था ।

इस यज्ञ के दौरान धरती पर 33 करोड़ देवी – देवता पुष्कर में ही मौजूद रहते है । सतयुग काल से से ही इन पांच दिनों का ख़ासा महत्व माना जाता है । इन पांच दिनों मे पवित्र सरोवर मे स्नान करने से पाँचों तीर्थों का पुन्य प्राप्त होता है । इसलिए इसे पञ्चतीर्थ स्नान भी कहा जाता है ।इन पांच दिनों में भी पूर्णिमा महास्नान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रदालुओ ने पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद पूजा अर्चना की और पुरोहितों को दान दक्षिणा दी ।जगतपिता ब्रह्मा के दर्शन के लिए भी श्रदालुओ की लंबी लंबी कतारें लगी ।
दूसरी तरफ रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ मेले का विधिवत समापन हो गया ।मेला ग्राउंड में आयोजित समापन समारोह में प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव जिला कलेक्टर आरती डोंगरा ,जिला पुलिस कप्तान राजेश कुमार चौधरी, मेला मजिस्ट्रेट समंदरसिंह,अतिरिक्त मेला मजिस्ट्रेट प्रशिक्षु आईपीएस तेजस्विनी राणा,सीआई नरेश शर्मा,अधिशासी अधिकारी विकास कुमावत सहित अनेक अधिकारी और धार्मिक सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे । सभी अतिथियों का पशु पालन अधिकारी ने स्वागत किया और विभाग की और से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । समारोह में राजस्थान के लोक कलाकारों सहित स्कूली छात्राओं ने एक से बढकर एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह में चार चाँद लगा दिए । इस मौके मटका दौड़, रस्साकसी सहित सभी मुख्य प्रतियोगिताओ का फिर से आयोजन हुआ।

इस मौके पर अंत में मेले को सफल सम्पन कराने में हर क्षेत्र में सहयोग प्रदान करने वाले लोगो का जिला प्रशासन की और से सम्मान किया गया और आभार व्यक्त किया गया ।जिला कलेक्टर आरती डोंगरा ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति का प्रतीक है ।पुष्कर मेले की अपनी आप मे अलग पहचान है और इसे नवाचारों के साथ भविष्य में और अधिक भव्यता प्रदान करने के प्रयास किये जायेंगे ।एसपी राजेश कुमार चौधरी ने कहा कि छिट पूत घटनाओं को छोड़कर मेला शांतिपूर्ण सम्पन हुआ और इतने बड़े जनसैलाब में थोड़ी बहुत कमी तो रह ही जाती है ।
कपड़ा बाजार में फिर बिगड़े हालात कपड़ा बाजार चौराहे पर आज भी दिन भर भीड़ के जाम लगते रहे ।लोगो को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा ।कई बार हालात बेकाबू होने लगे और भगदड़ के हालात भी बने ।इस दौरान मौके पर तैनात पुलिस जाप्ता मूकदर्शक बना रहा । इस चौराहे पर इससे बदतर हालात पिछले मेले की पूर्णिमा को भी हुए थे लेकिन पुलिस के पास सुधार का कोई रोडमेप नही था ।इसके अलावा इस बार घाटो ,बाजारों ,मेलाक्षेत्र में चोरी की बहुत वारदाते हुई ।


रस्साकस्सी में विदेशियों को दिखाई जमीन समापन समारोह में देशी विदेशी पर्यटको के आकर्षण का केंद्र रस्साकस्सी प्रतियोगिता में इस बार पुरुष वर्ग में मुकाबला बहुत ही रोचक रहा ।मुकाबला इतना संघर्षमय हुआ कि दो बार रस्सा ही टूट गया ।आखिरकार तीसरी बार देशी बॉयज ने विदेशियों को पराजित किया ।इस दौरान मेला मैदान में मौजूद हजारो देशी विदेशी पर्यटक भी रोमांचित हो गए ।हजारो ग्रामीण स्थानियो खिलाडिय़ों का हौसला बढ़ाते रहे ।दूसरी तरफ इससे पहले महिला वर्ग में देशी महिलाओ ने आसानी से विदेशी बालाओं को जमीन दिखाकर मुकाबला जीत लिया । ने एक बार फिर विदेशियों की चित कर दिया जबकि ग्रामीण महिलाओं को विदेशी बालाओ से हार का सामना करना पड़ा ।महिला वर्ग के लिए आयोजित प्रतियोगिता में एक बार की भीड़ अंदर आ गई जिसे पुरा आचारसंहिता का रहा असर पुष्कर मेले पर आगामी विधानसभा चुनावों और आचारसंहिता का गहरा असर दिखाई दिया ।जहां एक और पूरे प्रदेश में सियासी उफान के बीच पिछले वर्ष की अपेक्षा इस मेले में श्रदालुओ और मेलार्थियों में बड़ी कमी देखी गयी ।एक अंदाज के अनुसार इस बार चुनावो की नजदीकी के कारण लगभग एक लाख श्रदालु कम आये ।वही आचारसंहिता के चलतेजनप्रतिनिधियो की दखल नही होने के कारण प्रशासन ने केवल ओपचारिकता के रूप ही मेले को सम्पन कराकर राहत की सास ली ।प्रशासन के रवैये के कारण स्थानीय लोगो सहित श्रदालुओ को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा ।वही पूरे मेले पर भी आचारसंहिता का पूरा असर रहा ।कोई नवाचार तो नही हुआ बल्कि के परंपरागत आयोजन भी नही हो सके ।(PB)