JLF 2020 4th Day
Jaipur

JLF 2020 | घाटे की चिंता मत कीजिए, खुल करें खर्च : अभिजीत बनर्जी

OmExpress News / Jaipur / नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थषास्त्री अभिजीत बनर्जी का कहना है कि भारत में सरकारों को घाटे की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि खुल कर खर्च कर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीबों को छोटे कर्ज देने के बजाए कोई छोटी संपत्ति और उसका आय बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने का प्रोत्साहन दीजिए। यह ज्यादा काम करेगा। JLF 2020 4th Day

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को “पुअर इकोनोमिक्स-फाइटिंग ग्लोबल पावर्टी“ विषय पर आयोजित सत्र में पत्रकार श्रीनिवासन जैन से बातचीत के दौरान अभिजीत बनर्जी ने कहा कि हम सरकारी घाटे को कभी पूरा नहीं कर सकते। इसलिए इसकी चिंता किए बिना ज्यादा से ज्यादा खर्च करने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गरीबों को छोटे कर्ज देने के बजाए उन्हें गाय, बकरियां जैसी छोटी संपत्ति देनी चाहिए और इस बात के लिए प्रेात्साहित करना चाहिए कि वे इसका अपनी आय बढ़ाने के लिए उपयोग करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि बच्चों को सही समय पर सही शिक्षा दी जाए। अभी हम सिर्फ सिलेबस पूरा करने पर ध्यान देते है, जबकि अक्सर यह सिलेबस उनके काम का नहीं होता।

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बनर्जी ने कहा कि अथाॅरिटी सिर्फ एक भ्रम है। एक व्यक्ति सब कुछ सही नहीं कर सकता। विकेंद्रीकरण बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई मायनों में चीन में हमारे यहां से ज्यादा विकेंद्रीकरण है। एक सवाल के जवाब में उन्होने कहा कि मैं रिजर्व बैंक का गर्वनर नहीं बनना चाहता, क्योंकि उसके लिए मैक्रो इकोनोमिक्स का काम जरूरी है, जबकि मैं दूसरे क्षेत्र में काम करता हूं। उन्होंने कहा कि हो सकताा है मैं शायद यहां होता तो नोबेल नहीं ले पाता। मुझे यह मिला, क्योंकि मैं कुछ बेहतरीन लोगों के साथ काम कर रहा हूं और उनके सहयोग से हो यह हो पाया। लेकिन भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हमें बेहतर वातारण, लोगों का साथ और संस्थान चाहिए।

सत्र के बाद मीडिया से बातचीत में अभिजीत बनर्जी ने कहा कि पिछले दो माह में आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में सुधार के कुछ संकेत दिख रहे हैं, लेेकिन यह कब तक रहेगा, यह नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में एक मजबूत विपक्ष की कमी है। विपक्ष बंटा हुआ है। इसलिए सरकार पर दबाव नहीं बना पा रहा है। सरकार सही ढंग से काम करे, इसके लिए दबाव जरूरी है और इसके लिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है। देश में कोई जिम्मेदारी संभालने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं अभी अपना काम नहीं छोड़ रहा हूं। हालांकि यदि कोई सलाह मुझ से ली जाएगी तो मैं जरूर दूंगा। उन्होंने कहा कि हम विभिन्न राज्य सरकारों के साथ काम कर रहे हैं।

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मैं यह नहीं कहूंगा कि जिन्ना जीत गए लेकिन वह जीत रहे हैं : शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कहना है कि केरल, राजस्थान आदि राज्यों द्वारा सीएए के खिलाफ पारित प्रस्ताव एक राजनीतिक स्टेटमेंट है। हम इससे सहमत नहीं हैं, लेकिन यदि इसे लागू करने की बात होगी तो करना पड़ेगा, क्योंकि नागरिकता तो केंद्र सरकार ही दे सकती है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि सीएए के मामले में काम तो केंद्र का ही है और वह कर भी लेगा, लेकिन राज्यों का जो विरोध है, उस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएए के बाद जब केद्र एनपीआर या एनआरसी करना चाहेगी, तब राज्यों का सहयोग जरूरी होगा और उस समय राज्य मना कर देंगे तो केंद्र क्या करेगा। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता देने का विचार पाकिस्तान का है। JLF 2020 4th Day

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राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी दिए जाने के मुद्दे पर थरूर ने कहा कि गरीबों को सब्सिडी दी जाए तो उसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन यदि सबको देंगे तो सरकार दिवालिया होगी ही। यदि हम अपनी लागत का वापस कुछ भी नहीं ले रहे हैं, तो एक दिन दिक्कत आएगी ही। उन्होंने कहा कि दिल्ली के वोटर को यह बात समझनी चाहिए, क्योंकि केजरीवाल की सरकार कहती बहुत ज्यादा लेकिन जमीन पर बहुत कम दिखता है।

कांग्रेस सांसद व वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का राज्यों का कदम राजनीति से प्रेरित है क्योंकि नागरिकता देने में उनकी बमुश्किल ही कोई भूमिका नजर आती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (एनपीआर) और प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी के क्रियान्वयन में राज्यों की अहम भूमिका होगी क्योंकि केंद्र के पास मानव संसाधन का अभाव है, ऐसे में उनके अधिकारी ही इस काम को पूरा करेंगे।

एएनआइ के मुताबिक, सीएए लागू करने पर मोहम्मद अली जिन्ना के दो राष्ट्र वाले सिद्धांत वाले बयान पर शशि थरूर ने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि जिन्ना जीत गए, लेकिन वह जीत रहे हैं।

मुसलमानों के साथ हिंदू न्याय नहीं कर सकते

अगर सीएए एनपीआर और एनआरसी की ओर जाता है, तो उसी लाइन पर जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो आप कह सकते हैं कि जिन्ना की जीत पूरी हो गई है। जिन्ना जहां भी हैं, वे कहेंगे कि वह सही थे कि मुसलमान एक अलग राष्ट्र के लायक हैं क्योंकि मुसलमानों के साथ हिंदू न्याय नहीं कर सकते। JLF 2020 4th Day

गौरतलब है कि इससे पहले कोलकात में कांग्रेस सांसद व वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा था कि सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का राज्यों का कदम राजनीति से प्रेरित है क्योंकि नागरिकता देने में उनकी बमुश्किल ही कोई भूमिका नजर आती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (एनपीआर) और प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी के क्रियान्वयन में राज्यों की अहम भूमिका होगी क्योंकि केंद्र के पास मानव संसाधन का अभाव है, ऐसे में उनके अधिकारी ही इस काम को पूरा करेंगे।

बिजली, पानी सब फ्रीे देेंगे तो पांच साल बाद बचेगा क्या : अमिताभ कांत JLF 2020 4th Day

नीति आयाोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे मुख्यमंत्रियों को सोचना चाहिए कि यदि हम बिजली, पानी सब कुछ फ्री देेंगे तो पांच साल बाद हमारे पास बचेगा क्या। सब कुछ फ्री मत दीजिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से दी जााने वाली सहायता राज्यों को उनके प्रदर्षन के आधार पर देनी चाहिए।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इन्केडिबल इंडिया 2.0 विषय पर आयोजित सत्र में मोहित सत्यानंद के साथ बातचीत में अमिताभ कांत ने कहा कि देश के आर्थिक विकास दर को बढ़ाने के लिए राज्यों को भी अपनी विकास दर बढ़ानी होगी। हम संघीय व्यवस्था में रहते है और राज्यों की विकास दर बढ़ेगी तो देश की विकास दर अपने आप बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत को विकास के लिए छलांग लगानी है तो डिजिटल तकनीक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करना होगा। दुनिया में सबसे ज्यादा बायोमैट्रिक रिकार्ड हमारे पास है। सबसे ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हमारे पास हैं और हमें इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

H.P. Modi Group

अमिताभ कांत ने बिजली कंपनियों और रेलवे के निजीकरण की वकालत भी की और बिजली के मामले में हमें आगरा, कानपुर जैसे उदाहरणों से सीखना चाहिए, जहां बिजली का वितरण निजी क्षेत्र में जाने के बाद चोरी बहुत कम हो गई है। बेरोजगारी के लिए अमिताभ कांत ने कहा कि यह बड़ी समस्या है, लेकिन नौकरी मांगने वाला नहीं हमें नौकरी देने वाला बनना होगा।

वहीं, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक ऐसी ‘चिंगारी’ है जो लगता है बुझ गई, लेकिन फिर पता नहीं कहां से सुलग जाती है। महात्मा गांधी एक विचार के रूप में कभी खत्म नहीं हो सकते। वे अपनी मौत के बाद ज्यादा प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गए हैं।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शुक्रवार को गांधीजी पर आयोजित सत्र ‘गांधी इन अवर टाइम्स’ में जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) के प्रो. मकरंद परांजपे, लेखिका तलत अहमद, फिल्मकार रमेश शर्मा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता रूचिरा गुप्ता के साथ बातचीत में महात्मा गांधी के जीवन से जु़ड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के दौरान ये बातें कहीं।