बीकानेर। राजीव गांधी भ्रमण पथ पंचवटी में स्वास्थ्य साहित्य राष्ट्रीय कवि चौपाल कि 212वीं कड़ी आज दिनांक 14.07.2019 को साहित्य सभा विलक्षण बनाने में आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में श्री उमाकान्त गुप्ता मुख्य अतिथि रजनी रम्मण झा, विशिष्ट अतिथि में आकाशवाणी वरिष्ठ उद्धोषक प्रमोदजी शर्मा, डॉ. गौरी शंकर प्रजापत व संस्था संस्थापक नेमचंद गहलोत आज की सम्मानित प्रतिभा सप्त भाषी राजेन्द्र स्वर्णकार एवं राजस्थानी भाषा मान्यता प्राप्त में संघर्ष शील श्री मनोज स्वामी आदि मंचासीन हुए और कार्यक्रम संयोजन रवि पुरोहित ने किया…।


रामेश्वर द्वारकादास बाड़मेरा साधक ईश प्रार्थना की ”हे विभो आनन्द सिन्धो मे च मेधा दियताम… महेश बडगुर्जर – ओ जो म्हारा धीन धीन मोटा भाग म्हारे पावणा पधारया सा स्वागत गीत गाकर सरस्वती सभा का स्वागत किया। आज के कार्यक्रम अध्यक्ष उमाकान्त गुप्त ”चांद देखकर मुस्कुराना बेशक ईद है… इन्सान को देखकर इन्सान मुस्कुराए रोज की ईद हैÓÓ। आज के मुख्य अतिथि रजनी रम्मण झा ”जब तक अन्तश: में ऋषि भाव नहीं और कविता रचि नहीं जा सकती है…ÓÓ आपने राष्ट्रीय कवि चौपाल के साहित्य जागरण की सराहना की… विशिष्ट अतिथि में गौरीशंकर प्रजापत जब रूकती है आन्धी.. ठहर जाता है प्रकृति का कण कण…आज के विशिष्ट अतिथि प्रमोद शर्मा रोशनी के लिए बिजलियों से लड़ा, खुशबुओं के लिए तितलियों से लड़ा….संस्थापक नेमचंद गहलोत ने ”चार दिनों रो जीणों जग में क्यों बांधों हो बैर…ÓÓ आज की सम्मानित प्रतिभा सप्त भाषी राजेन्द्र स्वर्णकार द्वारा प्रस्तुत कृष्ण राधा और बांसुरी संबंधी कवित्त श्रृंखला ”किस किस लीला का बखान करूं सांवरा तो, चतुर सयाना पक्का पूरा लीलाधारी है… को मंच और उपस्थित जनसमूह द्वारा अत्यधिक पसंद किया गया।

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आज की सम्मानित प्रतिभा मनोज स्वामी सूरतगढ़ की राजस्थानी भाषा के जूनून निम्न पंक्तियों से आंकलन है ”खाली धडऱी कद हुए चेहरे बिन्या री पिचाण, मायड़ भाषा रे बिन्या क्यां रो राजस्थानÓÓ आज की सम्मानित प्रतिभाओं में राजेन्द्र स्वर्णकार का सम्मान पत्र रामेश्वर द्वारकादास बाड़मेरा ”साधकÓÓ वाचन किया तथा मनोज स्वामी का प्रशस्ति पत्र डॉ. महेश चुघ ने वाचन किया। मनोहर चावला – जो सरक सरक चले सरकार कहते है… मेरी क्या खता है मुझे क्या पता है डॉ. महेश चुघ – सृष्टि प्रदृत अन्तर को मत बांटो तुम, क्योंकि सृष्टि प्रदत को अन्तर मिटा भी नहीं सकते तुम…किशननाथ – रमक झमक कर आव बिरखा ऋतु करो सुहावणी, तू आवे ऐ बिरखो डावडी…पंकज जोशी – संर्घष सहर्ष ही जीवन है, उठ बैठ आलस को त्याग तुम रामाराम स्वर्णकार – शब्दों की पूजा करता हूं नहीं दलाली करता हूं।

चबा-चबा थोथे शब्दों को नहीं जुगाली करता हूं। वरिष्ठ रंगकर्मी बी.एल. नवीन – नसीब आजमाने आया हूं… डॉ. कृष्णलाला बिश्नोई – जिन्दगी बन गई कैसे राख का इक ढेर राजकुमार ग्रोवर – गांधी जी के 3 बन्दर धुस गए एक दिन बारात के अन्दर हनुमन्त गौड – मुझसे मिलते हो क्यों? खिल खिलाते हो क्यों? हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी – गांव रो चिमो काले सफर कर गयो माजीद खान – दस्त ऐ शफकत तो है बेटी में खुदा से और क्या मांगू महबूब अली – आया हूं देशनोक से देखों हिम्मत पेड़ के नीचे शिवप्रकाश सौलकी – गुरूदेव दया करके मुझ को अपना लेनामोहन वैष्वण – आतो घरती धोळे धाके धोरा री उंचे उचं पहाड़ों री। आज के कार्यक्रम संचालन चुटिले अन्दाज में सधे शब्दों संक्षिप्त सार गर्भित संचालन जाने माने चिर परिचति रवि पुरोहित ने किया।

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