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भाटी को यूं ही नहीं कहते मगरे का शेर

बीकानेर। जरूरतमंद लोगों व मजदूरों के हक-हकुकों की रक्षा के लिए देवी सिंह भाटी हमेशा से अग्रणी रहे हैं। यही वजह है कि आज भी मगरे के शेर के नाम से विख्यात इस दबंग नेता के आगे एक निजी कम्पनी को भी झुकना पड़ा। बात डराने-धमकाने की नहीं बल्कि ग्रामवासियों की मजदूरी की थी, फिर भाटी पीछे कैसे रहने वाले थे। इसी बात का उदाहरण देते हुए भाजपा नेता रामकिशन आचार्य ने बताया कि गजनेर गांव में रैज एक्सपर्ट ए सोलर कल्चर कम्पनी द्वारा ग्रामवासियों को लम्बे समय से भुगतान नहीं करने तथा ग्रामवासियों को मौके पर काम न देकर बाहर के लोगों को कार्य देने का मामला पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के समक्ष आया।

भाटी ने तुरन्त जिला कलक्टर , संभागीय आयुक्त को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा तथा १७ सितम्बर तक इस व्यवस्था को सही करने का दिया था। जिला कलक्टर ने तुरन्त कार्यवाही करते हुए कम्पनी के पदाधिकारी, ग्राम पंचायत गजनेर व चांडासर के लोगों से मीटिंग करके इसका निराकरण करवाया गया। रामकिशन आचार्य ने बताया कि कम्पनी की तरफ से निदेशक निधि गुप्ता व उसके कानूनी सलाहकार, गजनेर सरपंच जेठाराम, रेवंतराम, राधेश्याम, बहादुर सिंह, पप्पूराम, मुकेश, बाबूलाल, जोधसिंह, मालसिंह एवं अन्य ग्रामवासी भी उपस्थित रहे। समझौते पत्र मिलने पर देवी सिंह भाटी ने धरने व घेराव को निरस्त कर दिए।(PB)