2018_2image_16_51_206996410om-ll
शिवरात्रि शिव भक्तों का बहुत प्रिय त्यौहार माना जाता है। वैसे तो हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। ये हिंदू धर्म के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस पर्व को किसी भी अन्य पर्व, व्रत एवं विधान से बढ़कर माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सभी अन्य पर्व मिलकर भी महाशिवरात्रि की तुलना में नहीं की जा सकती। धर्म ग्रथों में यह पर्व को सबसे उत्तम व बड़ा बताया गया है एवं इस दिन किए गए व्रत एवं धार्मिक कार्य जरूर सफल होते हैं। यदि किसी भक्त के मन में कोई इच्छा हो और वह महाशिवरात्रि के दिन उसे पूर्ण करने के लिए पूरी श्रद्धा से भोले की आराधना करता है, तो ऐसा माना जाता है कि उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। आगे जानें महाशिवरात्रि के दिन किस तरह पूजा करनी एवं कौन से मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

WhatsApp Image 2018-02-09 at 2.50.58 PM
कुवारी कन्याओं के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे पहले उन कन्याओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो अविवाहित होती हैं। महाशिवरात्रि भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का दिन है, इसलिए विवाह से जुड़ी सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस दिन पूजा करना शुभ माना गया है। यदि किसी कारणवश किसी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो, तो उसे महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। इस दिन व्रती को फल, पुष्प, चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेध से चार प्रहर की पूजा करनी चाहिए। व्रती को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको मिलाकर पंचामृत से शिव स्नान कराकर जल से अभिषेक करना चाहिए। चार प्रहर के पूजन में शिव पंचाक्षर “? नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्ग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें और उनकी आरती उतारकर परिक्रमा करें।

JP Colletions
शिवरात्रि की पूजा के दौरान निम्न मंत्र का सही उच्चारण सहित जाप करें।
मंत्र- “? ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ?” शिवरात्रि के दिन इस मंत्र का पाठ करने से भगवान शिव से मन मुताबिक वरदान की प्राप्त होती है। घर में सुख-शांति एवं महिलाएं यदि सौभाग्य के लिए भोले शंकर से वरदान पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए – “? ह्रीं नम: शिवाय ह्रीं ?
यदि किसी कन्या की शादी में देरी हो रही है तो उसे इस शिव मंत्र के साथ माता पार्वती की भी इस मंत्र से उपासना करनी चाहिए, “हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया”।