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सामने आया स्मार्ट सिटी प्लान, राजस्थान के 4 शहर शामिल

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सामने आया स्मार्ट सिटी प्लान, राजस्थान के 4 शहर शामिल

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने देश में 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की अपनी योजना को मूर्त रूप देने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए मंगलवार को राज्यों को इनके मनोनयन के लिए शहरों का कोटा निर्धारित कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 13, तमिलनाडु को 12 और महाराष्ट्र को 10 शहरों के नाम भेजने को कहा गया है।  गुजरात-कर्नाटक में 6-6 और राजस्थान-बंगाल में 4-4 स्मार्ट सिटी होंगे। चुनाव की दहलीज पर खड़े बिहार के साथ आंध्र प्रदेश और पंजाब को तीन-तीन स्मार्ट सिटी की सौगात मिली है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत 25 जून को करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने शहरी विकास से जुड़ी दूसरी महत्वाकांक्षी योजना “अटल मिशन फॉर रिजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफोरमेशन” (अमृत) के लिए भी राज्यों को शहरों का आवंटन कर दिया है। इसके तहत कुल 500 शहरों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इस योजना में अभी 476 शहरों का आवंटन किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 54, महाराष्ट्र को 37 और मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु को 33-33 शहरों के नाम भेजने को कहा गया है।

दूसरे चरण में 100 शहर के बीच आपस में प्रतिस्पर्धा होगी जिसमें ये सब अपनी स्मार्ट योजना बनाएंगे जिनका मंत्रालय के विशेषज्ञ मानदंडों के अनुसार मूल्यांकन करेंगे। इस मूल्यांकन के आधार पर सभी स्मार्ट शहरों को रैंकिंग दी जाएगी। शीर्ष 20 शहरों को वित्त वर्ष 2015-16 में ही राशि का आवंटन किया जाएगा।

शेष 80 शहरों को कमियां दूर करने का समय दिया जाएगा जिसके बाद वे आगे के दो दौर में भाग ले सकेंगे। इसके बाद चुने जाने वाले 40 शहरों को 2016-17 और अगले 40 को उससे अगले वित्त वर्ष में विकास कार्यो के लिए राशि प्रदान की जाएगी। शहरी विकास मंत्रालय ने राज्यों को यह कोटा शहरी आबादी और नगर निकाय वाले शहरों एवं कस्बों की संख्या के आधार पर आवंटित किया है।

इसके अलावा, भौगोलिक क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि हर राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश को एक स्मार्ट सिटी अवश्य आवंटित की जाए। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में नगर निकाय वाले शहरों की संख्या 4041 है। इनमें से 500 शहरों की आबादी एक लाख से अधिक है जिन्हें अमृत योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इन 500 शहरों की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 73 प्रतिशत है।

सूत्रों के अनुसार, अमृत योजना के तहत चुने जाने वाले शहर के लिए मुख्य मानदंड यही है कि उसकी आबादी एक लाख या उससे अधिक होनी चाहिए। कुछ पर्वतीय, द्वीपीय तथा पर्यटन शहरों और गंगा के निकट बसे शहरों को भी योजना में शामिल किया जाएगा, भले ही इनकी आबादी एक लाख से कम हो। अभी सरकार ने इस योजना के तहत 500 में से 476 शहरों का कोटा घोषित किया है और बाकी 24 शहर का कोटा निर्धारित किया जा रहा है।

अभी निर्धारित कोटे के अनुसार देश में शहरी विकास का कायाकल्प करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ को दी गई है। इन 12 राज्यों की आबादी अमृत योजना के तहत चुने जाने वाले 500 शहरों की कुल आबादी का 70 प्रतिशत है। इनमें से 8 में भारतीय जनता पार्टी या उसके सहयोगी दलों की सरकार है और इनमें चुने गए शहरों की संख्या 476 में से 225 है।

जिन पांच केन्द्र शासित राज्यों के शहर चुने गए हैं उनको विकसित करने की जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की ही होगी। स्मार्ट सिटी योजना के तहत कुल 100 शहरों का आवंटन किया गया है जिसमें अंडमान निकोबार को एक, आन्ध्र प्रदेश तीन, अरूणाचल प्रदेश एक, असम एक, बिहार तीन, चंडीगढ़ एक, छत्तीसगढ़ दो, दमन और दीव एक, दादरा नगर हवेली एक, दिल्ली एक, गोवा एक, हिमाचल प्रदेश एक, जम्मू कश्मीर एक, झारखंड एक, कर्नाटक छह, केरल एक, लक्ष्यद्वीप एक, मध्य प्रदेश 7, महारार्षट्र 10, मणिपुर एक, मेघालय एक, मिजोरम एक, नगालैंड एक, ओडिशा दो, पुड्डुचेरी एक, पंजाब तीन, राजस्थान चार, सिक्किम एक, तमिलनाडु 12, तेलंगाना दो, उत्तर प्रदेश 13, उत्तराखंड एक और पश्चिम बंगाल को चार शहर दिए गए हैं।