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संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में बरसा भागवत रस

संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में बरसा भागवत रस

बीकानेर /ऋषिकेश । ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सींथल पीठाधीश्वर महंत क्षमाराम ने शुक्रवार को कहा कि भागवत इस सृष्टि की बहुत बड़ी धरोहर है। भागवत हमारे अन्तर्मन की दृष्टि को उज्ज्वल बनाती है। भागवत सृष्टि के परम सत्य का ङ्क्षचतन कराती है। सत्य का ज्ञान होता है।

भगवान वेदव्यास ने मंगलाचरण में कहा है कि आओ हम सब मिलकर भागवत के परम सत्य का ङ्क्षचतन करें। परमात्मा ही परम सत्य है। परमात्मा के अन्दर अनन्त गुण है। परमात्मा ने अपने सगुण भाव से भागवत को प्रकट किया। हमारे धर्म में जितने शास्त्र हैं वो कल्प वृक्ष हैं। लेकिन इनका पका हुआ फल भागवत है। भागवत को गहराई से पकड़ें। जब तक शरीर में चेतना रहे, तब तक इस दिव्य भागवत का निरन्तर पान करते रहें। भागवत रस को बार-बार पीते रहें।

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सींथल पीठाधीश्वर ने कहा कि समय किसी के वश में नहीं होता। यह संसार हर पल बदलता रहता है। वस्तुएं स्थितियां प्रति क्षण बदलती रहती है। इसलिए अपना समय अच्छे कामों में लगाएं। धन, समाज में प्रतिष्ठा, पद और अधिकार हों। लेकिन इनमें सबसे अधिक भगवान के प्रति समर्पण का भाव हो।

उन्होंने कहा कि लोभ करो लेकिन भगवान के भजन का करो। धन का लोभ मत करो। कामनाएं भी करो तो भगवान की करो। क्रोध करो तो अपनी गलतियों पर करो। इसमें बड़ा लाभ होगा।

धन का सदुपयोग धर्म में करें। अर्थ अॢजत करने के बाद उपयोग की सोचें। पैसे अच्छे काम में लगाएंगे तो धन की आसक्ति नहीं रहेगी। अर्थ का उपयोग कामनाओं की पूर्ति के लिए नहीं करें। इन्द्रियों के स्वाद में नहीं करें। शास्त्र कहते हैं दीनदुखियों की सेवा में लगाओ।

सनातन धर्म में शास्त्रों का है भंडार

कथा व्यास ने कहा कि सनातन धर्म में शास्त्रों का भंडार है। यह धर्म एक अस्पताल जैसा है। जहां हर व्याधि का इलाज है। जिसमें सबके कल्याण का मार्ग बतायाहै। जिसके मूल में भगवान है। जहां ज्ञान, भक्ति और वैराग्य से सम्बन्धित व्यापक दर्शन है। इसलिए सनातन धर्म की मर्यादाओं और सिद्धांतों का पालन करें। गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा है। गुरु बनाने के मात्र से कल्याण नहीं होता। जहां गुरु का स्वार्थ है वहां कल्याण नहीं होता।

आयोजकों व अतिथितियों ने किया भागवत पूजन

इससे पूर्व कथा आयोजक भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया के साथ गोसेवी पदमाराम कुलरिया, उगमाराम, देवकिसन, मघाराम कुलरिया, चीमाराम, सुखदेव, दीपक, नरेन्द्र, जगदीश कुलरिया सहित परिजनों, रिश्तदारों एवं अतिथियों ने भागवत पूजन किया। शुक्रवार को पांडाल खचाखच भरने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पांडाल के बाहर गंगा तट पर बैठकर भागवत श्रवण का आनन्द लेते रहे।

 

6 thoughts on “संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में बरसा भागवत रस

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