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शहीद कड़वासरा की पुण्यतिथि पर किए पुष्प अर्पित

गोटन। दिनेश कड़वासरा गोटन क्षेत्र के पास ग्राम पंचायत कड़वासरो की ढाणी के अमर शहीद भागीरथ कड़वासरा की पुण्यतिथि पर पांचला धाम के महंत योगेश्वर श्री 1008 सुरजनाथ जी महाराज व खेजड़ा जी धाम के पूज्य संत पांचाराम जी महाराज रामदास जी श्यामदास जी महाराज की समाधि स्थल के महंत बाबा गरीबबन्धु दास जी महाराज कड़वासरो की ढाणी सरपंच किस्तुर राम कड़वासरा हरसोलाव सरपंच सुरेश गुर्जर भाटियों की ढाणी सरपंच रामनिवास ताडा जिला सैनिक कल्याण बोर्डअधिकारी नागौर से पधारे कर्नल पी.एस. राठौड़ साब वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन सैनिक कल्याण से शंकरसिंह राठौड़ ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। शहीद भागीरथ की 8 जून 2002 को आतंकवादीयो से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। शहीद की 16 वी पुण्यतिथि शुक्रवार को मनाई गई।


सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी राठौड़ ने कहा कि शहीद की शहादत को भुला नही जा सकता है। एक सैनिक देश के लिए अपने प्राणों की प्रवाह किये बगैर देश की सेवा में रात दिन लगा रहता है। शहीद भागीरथ कड़वासरा की पुत्री सुष्मिता ने अपने शहीद पिता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया और कहा कि में मेरे पिता के देश सेवा करते हुए शहीद होने पर गौरवान्वित महसूस कर रही हु तथा सुष्मिता ने कहा कि में भी पिताजी की तरह सेना में जाकर देश की सेवा करूंगी।।


शहीद परिवार द्वारा सभी अधिकारियों का माला व साफ़ा पहनाकर स्वागत किया।।
महन्त सुरजनाथ जी महाराज ने संत और शूरवीर की महिमा के बारे में बताया और कहा कि भागीरथ कड़वासरा ने देश के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया था ऐसे शहीदों को बार बार सलाम की अपने घर परिवार की परवाह किए बगैर अपने प्राणों को देश हित के लिए न्यौछावर कर दिया। शहीद भागीरथ कड़वासरा हमेशा अमर रहेंगे। इस समय शहीद के पिता हपाराम कड़वासरा भाई संजय कड़वासरा पुत्री सुष्मिता कड़वासरा जसाराम पांचाराम रामलाल (पूर्व सैनिक) मदनलाल गोपाराम मुंडेल(मजदूर इंटक अध्यक्ष) रामचंद्र कड़वासरा नरेश कड़वासरा (पंचायत समिति सदस्य)जोगीराम लुम्बाराम कड़वासरा(रिटायर्ड सी.आई.) डावरराम भंवरिया रामनिवास कड़वासरा(शारिरिक शिक्षक ) जोगाराम गुर्जर आदि उपस्थित रहे।।


इनका कहना है:- एक सिपाही हमेशा देश सेवा के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर देश की सेवा करता है। अपने घर परिवार समाज से दूर एक संपूर्ण देश को ही एक समाज मानता है ऐसे वीर सैनिक की पुण्यतिथि मनाने पर हमें गर्व महसूस होता है।
लुम्बाराम कड़वासरा