Sharad Panwar NCP Chief
National Politics

शरद पवार : राजनीती का वो धुरंधर जिसके आगे नहीं चली किसी चाणक्य की नीति

OmExpress News / Om Daiya / महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले, एनसीपी नेता शरद पवार को इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट यानी ईडी के जरिए फंसाने की कोशिश भाजपा को इतनी भारी पड़ी कि अब वह देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य में सत्ता-सुख से वंचित होने जा रही है. शरद पवार ने बढ़ती उम्र के बावजूद अपना दम कुछ इस तरह से दिखाया कि भाजपा की न केवल सीटें कम हुईं, बल्कि उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना भी उससे अलग हो गई. विपरीत ध्रुवों वाली कांग्रेस और शिवसेना के साथ एनसीपी का गठबंधन करके शरद पवार ने नई सरकार भी बनवा दी. Sharad Panwar NCP Chief

शरद पवार ने इस तरह से एक बार फिर साबित किया कि वो राजनीति के सही मायनों में धुरंधर हैं और उनके सामने किसी भी चाणक्य की नीति नहीं चल सकती.

पचास साल से ऊपर के अपने राजनीतिक जीवन में पवार ने कई चुनौतियों और उतार-चढ़ाव का सामना सफलतापूर्वक किया, लेकिन इसके पहले उन्हें आपराधिक मामलों में फंसाने की कोशिश किसी ने नहीं की. इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ऐसा करने की कोशिश की तो उसे मात देकर पवार ने अपनी पावर साबित कर दी.

शरद गोविंदराव पवार एक वरिष्ठ भारतीय राजनेता हैं जो नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। वे तीन अलग-अलग समय पर महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। एक प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले शरद पवार केंद्र सरकार में भी रक्षा और कृषि मंत्री रह चुके हैं। वे पहले कांग्रेस पार्टी में थे पर सन 1999 में उन्होंने अपने राजनितिक दल ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ की स्थापना की। वर्तमान में वे राज्यसभा से सांसद हैं और अपनी पार्टी का वहां नेत्रत्व कर रहे हैं। राष्ट्रिय राजनीति और महाराष्ट्र के क्षेत्रीय राजनीति में उनकी कड़ी पकड़ है।

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राजनीति के साथ-साथ वे क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े हुए हैं। सन 2005 से 2008 तक भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और सन 2010 से 2012 तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कौंसिल के भी अध्यक्ष थे। 2001 से 2010 तक वे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष रह चुके हैं और जून 2015 में एक बार फिर उन्हें मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया। Sharad Panwar NCP Chief

प्रारंभिक जीवन

शरद गोविंदराव पवार  का जन्म 12 दिसम्बर 1940 में महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके पिता गोविंदराव पवार बारामती के कृषक सहकारी संघ में कार्यरत थे और उनकी माता शारदाबाई पवार कातेवाड़ी (बारामती से 10 किलोमीटर दूर) में परिवार के फार्म का देख-रेख करती थीं। शरद पवार ने पुणे विश्वविद्यालय से सम्बद्ध ब्रिहन महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (BMCC) से पढ़ाई की।

राजनितिक जीवन

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री यशवंत राव चौहान को शरद पवार का राजनैतिक गुरु माना जाता है। सन 1967 में शरद पवार कांग्रेस पार्टी के टिकट पर बारामती विधान सभा क्षेत्र से चुनकर पहली बार महाराष्ट्र विधान सभा पहुंचे। सन 1978 में पवार ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में एक गठबंधन सरकार बनायी और पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। सन 1980 में सत्ता में वापसी के बाद इंदिरा गाँधी सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त कर दिया। Sharad Panwar NCP Chief

सन 1980 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत मिली और ए.आर. अंतुले के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी। सन 1983 में पवार भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस (सोशलिस्ट) के अध्यक्ष बने और अपने जीवन में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोक सभा चुनाव जीता। उन्होंने सन 1985 में हुए विधान सभा चुनाव में भी जीत अर्जित की और राज्य की राजनीति में ध्यान केन्द्रित करने के लिए लोक सभा सीट से त्यागपत्र दे दिया। विधान सभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस (सोशलिस्ट) को 288 में से 54 सीटें मिली और शरद पवार विपक्ष के नेता चुने गए।

सन 1987 में शरद पवार कांग्रेस पार्टी में वापस आ गए। जून 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शंकरराव चौहान को केन्द्रीय वित्त मंत्री बना दिया जिसके बाद शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री बनाये गए। सन 1989 के लोक सभा चुनाव में महाराष्ट्र के कुल 48 सीटों में से कांग्रेस ने 28 सीटों पर विजय हासिल की। Sharad Panwar NCP Chief

परवरी 1990 में हुए विधानसभा चुनाव में शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी और कांग्रेस पार्टी ने कुल 288 सीटों में से 141 सीटों पर विजय हासिल की पर बहुमत से चुक गयी। शरद पवार ने 12 निर्दलीय विधायकों से समर्थन लेकर सरकार बनायीं और मुख्यमंत्री बने।

सन 1991 लोक सभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या कर दी गयी जिसके बाद अगले प्रधानमंत्री के रूप में नरसिंह राव और एन. डी. तिवारी के साथ-साथ शरद पवार का नाम भी आने लगा। लेकिन कांग्रेस संसदीय दल ने नरसिंह राव को प्रधानमंत्री के रूप में चुना और शरद पवार रक्षा मंत्री बनाये गए। मार्च 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुधाकरराव नायक के पद छोड़ने के बाद पवार एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वे 6 मार्च 1993 में मुख्यमंत्री बने पर उसके कुछ दिनों बाद ही महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई 12 मार्च को बम धमाकों से दहल गई और सैकड़ों लोग मारे गए।

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सन 1993 के बाद शरद पवार पर भ्रष्टाचार और अपराधियों से मेल-जोल के आरोप लगे। ब्रिहन्मुम्बई नगर निगम के उपयुक्त जी.आर. खैरनार ने उनपर भ्रष्टाचार और अपराधियों को बचाने के आरोप लगाये। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी महाराष्ट्र वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की और अनसन किया। विपक्ष ने भी पवार पर इन मुद्दों को लेकर निशाना साधा। इन सब बातों से पवार की राजनैतिक साख भी गिरी।

सन 1995 के विधान सभा चुनाव में शिव-सेना बी.जे.पी. गठबंधन ने कुल 138 सीटों पर विजय हासिल की जबकि कांग्रेस पार्टी केवल 80 सीटें ही जीत सकी। शरद पवार को इस्तीफा देना पड़ा और मनोहर जोशी प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। सन 1996 के लोक सभा चुनाव तक शरद पवार राज्य विधान सभा में बिपक्ष के नेता रहे और लोक सभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने विधान सभा से त्यागपत्र दे दिया।

सन 1998 के मध्यावधि चुनाव में शरद पवार के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने महाराष्ट्र में 48 सीटों में से 37 सीटों पर कब्ज़ा जमाया। शरद पवार 12वीं लोक सभा में विपक्ष के नेता चुने गए। Sharad Panwar NCP Chief

सन 1999 में जब 12वीं लोकसभा भंग कर दी गयी और चुनाव की घोषणा हुई तब शरद पवार, तारिक अनवर और पी.ए.संगमा ने कांग्रेस के अन्दर ये आवाज़ उठाई कि कांग्रेस पार्टी का प्रधानमंत्री उम्मीदवार भारत में जन्म लिया हुआ चाहिये न कि किसी और देश में। जून 1999 में ये तीनों कांग्रेस से अलग हो गए और ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ की स्थापना की। जब 1999 के विधान सभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तब कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने मिलकर सरकार बनायी।

सन 2004 लोक सभा चुन्नव के बाद शरद पवार यू.पी.ए. गठबंधन सरकार में शामिल हुए और उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया। सन 2012 में उन्होंने सन 2014 का चुनाव न लड़ने का एलान किया ताकि युवा चेहरों को मौका मिल सके।

राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी

पवार जहां झटका देना जानते हैं, वहीं एक कदम पीछे हटना भी उनकी चालों में शामिल रहा है. यही कारण है कि 2004 में महाराष्ट्र में उन्होंने अपनी पार्टी की सीटें कांग्रेस की सीटों से ज्यादा होते हुए भी मुख्यमंत्री का पद कांग्रेस को देने में कोई ना-नुकर नहीं की.

देखा जाए, तो वही परंपरा इस समय शिवसेना-भाजपा गठबंधन के टूटने के कारण बनी क्योंकि शिवसेना कम सीटें होते हुए भी अपना सीएम अब चाहती थी और भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई.

पवार के राजनीतिक दांव-पेंचों की सूची बड़ी लंबी है. एक समय उनके संबंध शिवसेना से ठीक-ठाक थे, लेकिन बाद में उसी शिवसेना को किनारे करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई. Sharad Panwar NCP Chief

2014 में भी जब शिवसेना, भाजपा को समर्थन देने के बदले सौदेबाजी करना चाहती थी, तब शरद पवार ने ही भाजपा को समर्थन की पेशकश करके शिवसेना को झुकने पर मजबूर किया था. दरअसल, वहीं से शिवसेना और भाजपा के बीच दरार पड़ गई.

राजनीतिक विश्लेषकों को पवार का ये दांव तब समझ में नहीं आया था, लेकिन वे जान गए थे कि भाजपा और शिवसेना को आगे चलकर अलग करने के लिए ये कदम जरूरी है. हुआ भी यही, शिवसेना के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया और जिसको बचाने के लिए वह आधे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद पर अड़ गई और भाजपा के राजी न होने पर वह उन्हीं शरद पवार के दरवाजे नतमस्तक हो रही है.

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पवार ने महाराष्ट्र में 2014 में सरकार बनाने में परोक्ष रूप से भाजपा की मदद कर दी थी, तो 2019 में भाजपा को निपटाने में भी उनका ही बड़ा योगदान रहा. नेतृत्व और आपसी टकराव के संकट से जूझ रही कांग्रेस तो महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के सामने ज्यादा दम नहीं दिखा पाई, लेकिन अपने खिलाफ ईडी की कार्रवाई से खार खाए शरद पवार ने बढ़ती उम्र के बावजूद पूरी ताकत झोंक दी. नतीजतन, 200 पार का सपना देख रही भाजपा 2014 की 124 सीटों की तुलना में और नीचे गिरकर 105 तक आ गई.

मौजूदा हालात में, पवार ही महाराष्ट्र में पावर के सेंटर बने हुए हैं. शिवसेना भाजपा का साथ छोड़कर उनकी शरण में है, कांग्रेस किसी कुशल रणनीतिकार के अभाव में पवार के इशारे पर चलने में ही बेहतरी समझ रही है, और भाजपा पर तो सरकार से बाहर होने का कहर टूटा ही है.

खेल-कूद प्रशासन

शरद पवार कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, फूटबाल और क्रिकेट जैसे खेलों में दिलचस्पी रखते हैं और इनके प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं। वे नीचे दिए गए सभी संगठनों के मुखिया रह चुके हैं। Sharad Panwar NCP Chief

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन
महाराष्ट्र कुश्ती एसोसिएशन
महाराष्ट्र कबड्डी एसोसिएशन
महाराष्ट्र खो-खो एसोसिएशन
महाराष्ट्र ओलंपिक्स एसोसिएशन
भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् के उपाध्यक्ष
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् के अध्यक्ष

विवादों में

शरद पवार के राजनितिक जीवन में समय-समय पर विभिन्न विवादों में उनका नाम आया। उनपर भ्रष्टाचार, अपराधियों को बचाने, स्टाम्प पेपर घोटाले, जमीन आवंटन विवाद जैसे मामलों कें शामिल होने का आरोप लगा। Sharad Panwar NCP Chief

निजी जीवन

शरद पवार का विवाह प्रतिभा शिंदे से हुआ। पवार दंपत्ति की एक पुत्री है जो बारामती संसदीय क्षेत्र से सांसद है। शरद पवार के भतीजे अजित पवार भी महाराष्ट्र की राजनीति में प्रमुख स्थान रखते हैं और पूर्व में महाराष्ट्र राज्य के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। शरद के छोटे भाई प्रताप पवार मराठी दैनिक ‘सकल’ का संचालन करते हैं।