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नकारा और पेशेवर लोगो को मिलेगा ‘प्रसाद’

जयपुर। (वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी की कलम से) वैसे तो हर चुनाव रोचक और कौतूहल से भरे होते है । मतदाता और खुद प्रत्याशी केवल आकलन ही कर सकते है । लेकिन किसकी जीत और किसकी हार होगी, कोई पुख्ता दावा नही कर सकता । मतपेटी खुलने के बाद ही असलियत सामने आती है । प्रेस क्लब के चुनाव भी बड़े रोचक होने जा रहे है । पिछले साल भी रोचकता में कोई कमी नही थी । क्लब के इतिहास में अध्यक्ष पद पर राधारमण और अभय जोशी को बराबर मत मिले । चार वोट से बिलू बना पीछे रह गए । वरना वे भी करीब करीब अध्यक्ष की कुर्सी पा चुके थे ।

यह रोचकता इस साल भी बरकरार है । अध्यक्ष पद के लिए राधारमण, अभय जोशी और मुकेश मीणा के बीच त्रिकोणात्मक टक्कर है । तीनो ही प्रत्याशियों के समर्थक अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे है । ताजा हालत के मुताबिक टक्कर अभय जोशी और मुकेश मीणा के बीच मानी जा रही है । मतदाताओं से हुई बातचीत और मन टटोलने से अहसास हुआ कि मुकेश मीणा ने जोर नही लगाया तो अभय जोशी बाजी मार सकते है । मीणा के समर्थक जोशी द्वारा किये गए वायदों की याद दिलाकर माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे है ।

जोशी अपने द्वारा किये गए कार्यो को लेकर मतदाताओं के सामने है । छह माह में किये गए कार्यो से कुछ मतदाता संतुष्ट है तो ज्यादातर लोग इस बात से भी खफा है कि जोशी ने ऐसे वादे किए ही क्यो, जिनको पूरा करने में वे नामकामयाब रहे । कुछ भी हो, जोशी ने काम करने का जज्बा अवश्य दिखाया, लेकिन उसको वे कितना भुना पाते है, अहम मुद्दा यही है । बहरहाल जोशी अलग रणनीति बनाकर चुनावी जंग जीतने के लिए जोर लगा रहे है । जोशी को ब्राह्मण, जैन, बनिये और बुजुर्गों के वोट बहुतायात में मिल गए तो मुकेश मीणा के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है ।

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यूँ मुकेश के पास समर्पित युवा कार्यकर्ताओ की टीम है जिनमे रोशन शर्मा, विकास शर्मा तथा राहुल गौतम सरीखे ब्राह्मण भी है । युवा और नए पत्रकारों का सहयोग मुकेश मीणा की सबसे बड़ी पूंजी है । फ़ोटो जर्नलिस्टों की इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी । इनके वोट जिसकी झोली में जाएंगे, उसकी जीत सुनिश्चित है । इन हालातों में किसी प्रकार की भविष्यवाणी करना नाइंसाफी होगी । क्योंकि आज के हालात में दोनों बराबर की स्थिति में है । बदलाव के नारा मुकेश मीणा को अवश्य फायदा पहुंचा सकता है । राजनीति के माहिर खिलाड़ी एल एल शर्मा की सक्रिय भूमिका को भी नजरअंदाज नही किया जा सकता है । उनके पास एक बहुत बड़ा वोट बैंक है । तभी तो पांच बार अध्यक्ष बनने का रिकार्ड कायम किया है । उन्होंने स्पस्ट तौर पर अपने पत्ते खोले है । जिसके समर्थन में सक्रिय होगये, उसके लिए जीत आसान हो जाएगी ।

उधर राधारमण भी ब्राह्मण और अपने परम्परागत वोट के सहारे जीत की उम्मीद लगाए बैठे है । कोई राधारमण को कमतर आंक कर चल रहा है तो वह भारी मुगालते में है । एक बहुत बड़े वोट बैंक पर उसका कब्जा है जिसे भेद पाना बहुत कठिन है । एनटिकम्बेंसी और मुकेश चौधरी का साथ राधारमण के लिए घातक सिद्ध हो सकता है । हो सकता है कि उन्होंने वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में सार्थक पहल की हो । लेकिन इनके कार्यकाल में कई ऐसे अनैतिक और अवांछित कार्य हुए है जो उनके लिए घातक सिद्ध हो सकते है । भले ही वे इसके लिए कम समय की ओट ले रहे हो । लेकिन छह माह के कार्यकाल में वह अभय जोशी के मुकाबले बौना ही साबित हुआ । कुछ ने यह राय भी व्यक्त की कि मुकेश और अभय जोशी की टक्कर का राधारमण को फायदा भी हो सकता है । राधारमण से काफी लोग इस बात से भी खफा है कि वह बार बार चुनाव लड़ता क्यो है । यह फेक्टर भी उसके लिए घातक सिद्ध हो सकता है ।

जहाँ तक महासचिव का सवाल है, हरीश गुप्ता और रामेंद्र सिंह के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है । निवर्तमान महासचिव मुकेश चौधरी पहले जरूर मजबूत स्थिति में था । लेकिन अब स्थिति डावांडोल होती जा रही है । ज्यादातर मतदाताओं का एक ही सवाल है कि क्लब में क्या लड्डू मिल रहे है जो हर बार खड़ा हो जाता है । सबको पता है कि इसने क्लब का भट्टा बैठाने में कोई कसर बाकी नही रखी । अगर यह पुन: चुन लिया जाता है तो क्लब पर ताला लगना सुनिश्चित है । इसके भरतपुर और जाट वाले वोटों में रामेंद्र सिंह भारी सेंधमारी करेगा । क्योकि रामेंद्र मूल रूप से भरतपुर का रहने वाला है । जबकि मुकेश यूपी का है । रामेंद्र सिंह का जाट होना भी मुकेश के कष्टकारी साबित होगा ।

हरीश गुप्ता और रामेंद्र सिंह में कांटे का मुकाबला है । गुप्ता को युवा और बुजुर्ग पत्रकारों के सहयोग का भरोसा है तो रामेंद्र सिंह के पास भी भरतपुर के अतिरिक्त दो-तीन मीडिया हाउस का वोट बैंक है । दोनों ही जीत के दावे कर रहे है, लेकिन असलियत 31 मार्च को तब सामने आएगी जब मतपेटियां खुलेगी । मुकेश चौधरी को मिलने वाले वोट रामेंद्र हथियेगा जिसका सीधा लाभ हरीश गुप्ता को मिलेगा । पहले दोनों में से एक के खड़े होने की बात थी, लेकिन मामला बैठा नही । दोनों में से कोई एक खड़ा होता तो मुकेश की जमानत जब्त होना लाजिमी था ।
मैदान में परमेशर और मुकेश शर्मा भी है । लेकिन मतदाता फिलहाल इनको ज्यादा अहमियत देते नजर नही आ रहे है । दोनों को ही नॉन सीरियस कंडीडेट माना जा रहा है । मतदाताओं का कहना है कि 50 के भीतर दोनों जने सिमट जाएंगे ।

उपाध्यक्ष पद पर बबिता शर्मा, प्रभाकर शर्मा और गिरधारी पारीक के बीच कड़ी टक्कर है । मतदाताओं का मानना है कि बबिता और प्रभकार शर्मा जीत के झंडे गाढ़ सकते है । कोषाध्यक्ष पद के लिए राहुल सन्नी आत्रेय और डीसी जैन के बीच कड़ा मुकाबला है । खड़े होने को रघुवीर जांगीड़ और राहुल जैमन भी है । लेकिन राहुल को मतदाता इतनी तवज्जोह नही दे रहे है । रघुवीर की तानाशाही और मनमानी प्रव्रत्ति की वजह से मतदाताओं ने इनसे मुँह मोड़ लिया है । डीसी जैन की स्थिति फिलहाल सबसे सुदृढ़ मानी जा रही है । लेकिन सन्नी आत्रेय को कम आंकना भी बेवकूफी होगी । कार्यकारिणी सदस्य में से निखलेश शर्मा, शाहनवाज अली, मयंक शर्मा, मनोज शर्मा, अनिता शर्मा और कानाराम कड़वा मजबूत स्थिति में है ।

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