आईआईटी मंडी और डीआईएचएआर के बीच एमओयू, उच्च हिमालयी प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान व प्रशिक्षण को बढ़ावा
03 फरवरी 2026; मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी, जो देश के अग्रणी आईआईटी संस्थानों में से एक है, ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहयोग से अपने नॉर्थ कैंपस में आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस कार्यशाला में डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं—हाई एनर्जी मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल), आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई), टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल), सेंटर फॉर फायर, एक्सप्लोसिव एंड एनवायरनमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस) तथा डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च (डीआईएचएआर)—के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ आईआईटी मंडी के संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, आईआईटी मंडी और डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च (डीआईएचएआर) के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं मानव संसाधन प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
उद्घाटन सत्र में आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, डीआरडीओ के महानिदेशक (आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग) डॉ. प्रतीक किशोर तथा पुणे स्थित हाई एनर्जी मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल) के निदेशक डॉ. ए. पी. दाश ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाने के लिए अकादमिक संस्थानों और रक्षा अनुसंधान संगठनों के बीच सतत सहयोग के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत आईआईटी मंडी के डीन (एसआरआईसी) प्रो. श्याम मसकापल्ली के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने डीआरडीओ द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के माध्यम से आईआईटी मंडी के संकाय सदस्यों की महत्वपूर्ण शोध उपलब्धियों को रेखांकित किया। इसके बाद डीआरडीओ मुख्यालय के आर्मामेंट रिसर्च बोर्ड (एआरएमआरईबी) के समन्वयक डॉ. आशीष जौहरी ने एआरएमआरईबी का परिचय देते हुए आर्मामेंट प्रौद्योगिकियों में अकादमिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अनुसंधान को सशक्त बनाने के इसके मिशन की जानकारी दी।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा, “आईआईटी मंडी में हम महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डीआरडीओ के साथ हमारा सहयोग यह सुनिश्चित करता है कि अकादमिक नवाचार व्यावहारिक समाधान में परिवर्तित हों, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी नेतृत्व को मजबूती मिले।”
डीआरडीओ के महानिदेशक (आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग) डॉ. प्रतीक किशोर ने कहा, “आईआईटी मंडी जैसे अकादमिक संस्थान वैज्ञानिक गहराई और नवाचार के माध्यम से रक्षा अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के सहयोग आर्मामेंट प्रौद्योगिकियों में सशक्त और स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।”
उद्घाटन सत्र के बाद कार्यशाला में तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें आर्मामेंट अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों पर एआरएमआरईबी पैनल समन्वयकों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन क्षेत्रों में आर्मामेंट डिजाइन मैकेनिज्म एवं बैलिस्टिक्स, आर्मामेंट अनुप्रयोगों के लिए सामग्री, आर्मामेंट सेंसर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, दहन, डेटोनेशन एवं शॉकवेव्स, सुरक्षा, परीक्षण एवं मूल्यांकन तथा हाई एनर्जी मैटीरियल्स शामिल रहे। प्रत्येक सत्र के बाद संवादात्मक चर्चा हुई, जिसने अकादमिक–वैज्ञानिक विचार-विमर्श की भावना को सुदृढ़ किया।
यह कार्यशाला आईआईटी मंडी की एक सशक्त अकादमिक–रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास तथा अत्याधुनिक रक्षा नवाचार में भारत की आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण में योगदान देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
