देश की आर्थिक स्थिति का आकलन अमीरों से नहीं मिडिल क्लास से करें यह नहीं देखे कितने अमीर हो गए यह देखे की कितने मिडिल क्लास से लोअर मिडल क्लास हो गए। अमूमन सभी अरब – खरबपति की संपत्ति बढ़ रही है। स्माल स्केल इंडस्ट्रीज अब धीरे धीरे वेरी स्माल स्केल इंडस्ट्रीज की ओर धकेला गई है उन्हें कोई राहत या नुकसान की भरपाई नहीं मिलती है जो एक कृषक को मिलती है जबकि उद्योग जगत स्किल और अनस्किल्ड लेबर के लिए रोजगार बढ़ाता है।

आम जनता की मुसीबत
सब कुछ टैक्स आप जन-जन तक से ले रहे। टेक्स स्लेब बढ़ा रहे है। स्थानीय टैक्स भी सिर उठा उठाकर काट रहे हैं। पेट्रोल डीजल के भाव आए दिन बढ़ा रहे हैं। छोटे प्लाट पर मकान का नक्शा पास कराने की फीस कई हजारों में पहुंच गई। क्या चाहते हो आप जनता से, मेहनत मजदूरी कर दो वक्त की रोटी खाओ और बस जीते रहो। जब सत्तारूढ़ पार्टी के आदमी घर घर जाकर पार्टी के लिए या अन्य बातों के लिए चंदा लेने जाते हैं तो उन्हें चंदा नहीं देने वाला उनके निशाने पर आ जाता है। यह एक मानसिक दबाव है। बार-बार चंदा मांगना आम आदमी को कितना मुश्किल में डालता है यह अनुभव सत्तारूढ़ नहीं कर सकते।

ईमानदारी
आम आदमी से, व्यापारी से, छोटे छोटे लोगों से ईमानदारी की उम्मीद सरकार चाहती हैं पर यह जो बैंके हजारों करोड़ रुपए का लोन दे देती है क्या वह इमानदारी से दिया गया, इस बात पर सरकार ने आज तक कितने बैंक डायरेक्टर या बैंक मैनेजर को भी अरेस्ट किया। कुछ आंकड़े जुटाने वालों का यह मानना है कि देश के जितने भी सरकारी अधिकारी या उच्च पदों पर है और जो रिटायर भी हो चुके, उनमें से गिने-चुने ईमानदार को छोड़कर बाकी सभी की संपत्ति यदि जोड़ी जाए तो वह अकुट कुबेर धन बन जाएगा सरकार को कभी भी किसी से टैक्स लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ब्यूरोक्रेट को अधिक पावर देने के इस दौर में भ्रष्टाचार बहुत फैल चुका है।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)