

बीकानेर। बीकानेर शहर की स्थापना को 536 वां दिवस मनाया शहर में शनिवार को अक्षय द्वितीय और अक्षय तृतीय दो दिन तक चलने वाले इस उत्सव के चलते मटकी पूजन के साथ हर घर में गेहूं बाजरे का खीचड़ा बना और गर्मी से बचने के लिए पीने के लिए इमलाणी पिया । इसी इमलाणी के सहारे लोग तेज धूप में भी घर की छत पर पतंगबाजी की जो शाम होते-होते परवान चढ़ जाएगी। इससे ज्यादा पतंगबाजी रविवार को होगी। एक अनुमान के मुताबिक बीकानेर में महज दो दिन में करीब दस करोड़ रुपए का पतंगों का व्यापार होता है।
सुबह सूर्योदय के साथ ही बीकानेर में पतंगबाजी का दौर में शहर पतंग बाजी के रंग में जमा नज़र आया । बोय काट्या और उड़ा-उड़ा के जयघोष के साथ लोग एक दूसरे को न सिर्फ चैलेंज देते हैं बल्कि जोश भी भर देते हैं। हर उम्र के बच्चे, युवा और बुजुर्ग दिनभर छत पर ही रहने वाले हैं। महिलाएं भी पीछे नहीं है, शाम को बड़ी संख्या में महिलाएं भी घर की छत पर नजर आती है। पतंगबाजी भी करती है। वैसे तो पूरे शहर में ही पतंगबाजी चरम पर थी लेकिन परकोटे के भीतर सातवें आसमान पर । कहीं छत पर डीजे चल रहा है तो कहीं मोबाइल पर बज रहे गानों पर ही लोग थिरक रहे हैं। धूप से बचने के लिए लोगों ने बेड शीट्स को ही टेंट बना लिया है। कोई पतंगों में धागा लगाने का काम कर रहा है तो कोई फटी पतंगों को चिपकाने का। । शाम को छत से एक पतंग कटने के साथ ही दूसरी आसमान में चढऩे लगेगी।
-पतंगों के बाजार में भीड़
बीकानेर में इन दिनों पतंगों व मांझे के बाजार में जबर्दस्त भीड़ है। बीकानेर में सौ से ज्यादा दुकानों पर पतंगें बिक रही हथी । छोटी दुकानें अलग है जो हर गली मोहल्ले में खुली हुई है। माना जा रहा है कि इस बार बीकानेर में करीब दस करोड़ रुपए की पतंगों का व्यापार हो रहा है। इसमें मांझा भी शामिल है। बीकानेर में बरेली, लखनऊ, कानपुर सहित उत्तरप्रदेश के कई शहरों में बनने वाली पतंगें और मांझा बिक रहा है। जयपुर में बनी पतंगें भी बीकानेर आ रही है जो अन्य की तुलना में सस्ती है। इसके बाद भी लोग उत्तरप्रदेश की पतंगों को ज्यादा पसन्द करते हैं। इन सामान्य पतंगों की कीमत पांच रुपए से पचास रुपए तक है। ऐसे फैंसी पतंगों की कीमत इससे भी ज्यादा है।
