

कन्याकुमारी से आरम्भ हुई राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने कल सो दिन पूरे कर लिए। इस समय यात्रा राजस्थान में है, जिसे कांग्रेस के लिए सबसे समस्या वाला राज्य इस यात्रा के आने से पहले माना जा रहा था। भले ने नेताओं ने अपने शक्ति बल का प्रदर्शन किया मगर अनुशासन की सीमा में रहकर। पिछले जो महीने से चल रही गुटों के मध्य की जुबानी जंग भी यात्रा के समय बंद है और एक होने की जुगलबंदी के गीत गाये जा रहे हैं। हालांकि ये स्थायी है या नहीं, ये तो यात्रा के राजस्थान से निकलने के बाद ही पता चल पायेगा। मगर यात्रा के दौरान तो अशोक गहलोत व सचिन पायलट साथ साथ दिख रहे हैं, दोनों के मध्य तनाव भी अभी तो गायब है।
राहुल ने सो दिन की यात्रा होने के बाद कल जयपुर में पत्रकारों से बात की। उस बातचीत से ये तो आभाष हो गया कि यात्रा ने न केवल राहुल को लेकर बने परसेप्शन को बदला है अपितु कांग्रेस में भी एक सकारात्मक बदलाव हुआ है। जिसे लगातार हार रही कांग्रेस के लिए शुभ संकेत माना जाना चाहिए। ये लोकतंत्र के लिए भी शुभ बात है, क्योंकि बिना मजबूत विपक्ष जनता का हित सम्भव नहीं।
पहले बात राहुल की। अब राहुल के व्यवहार में एक ठहराव साफ नजर आता है। पहले की तरह वे तैश में नहीं आते और न उग्र होकर कोई टिप्पणी करते हैं। जो राजनीति के प्रति उनकी गंभीरता को अभिव्यक्त करते हैं। नहीं तो पहले ये ही राहुल पसंद न आने वाली नीतियों के कागज भी फाड़ देते थे।
अब उनके जवाबों में जहां सरकार पर व्यंग्य के बाण चलते हैं वहीं भाषा भी संयत होती है। पीएम और भाजपा ने सदैव उनके बयानों को ही आधार बनाकर कांग्रेस पर हमले किये हैं और चुनावों में फायदा उठाया है। मगर अब इस तरह के अवसर राहुल उनको नहीं दे रहे हैं। मीडिया की पक्षधरता पर भी राहुल निराले और सौम्य अंदाज में हमलावर रहते हैं, ये बड़ा चेंज है।
देश में राजनीति को समझने वाला हर व्यक्ति जानता है कि कांग्रेस में आलाकमान गांधी परिवार है और इसी कारण भाजपा पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। मगर अब इससे भी पार्टी को बचाने में राहुल लगे दिखते हैं। खड़गे का अध्यक्ष बनना और संगठन से जुड़े हर सवाल पर ये कहना कि ये पार्टी अध्यक्ष से जुड़ा मसला है, वे ही बता सकते हैं। संगठन में आलाकमान खड़गे हैं, ये ही स्वर अब राहुल के रहते हैं। जनता में उनके इस बदलाव की चर्चा है जो इस बात की द्योतक है कि उनकी छवि जो भाजपा या विपक्ष ने पेंट की थी उसमें बदलाव हुआ है। ये अंततः तो कांग्रेस को ही फायदा देगी।
कांग्रेस में भी यात्रा से बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है। अस्तित्व की लड़ाई लड़ते पार्टी के नेता अपने बयानों के हमले आलाकमान के निर्देश के बाद भी जारी रखते थे, मगर इस बार उन पर लगी लगाम साफ दिख रही है। वेणुगोपाल ने यात्रा के राजस्थान में प्रवेश से पहले स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की बयानबाजी सहन नहीं होगी। यदि हुई तो तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी। इस चेतावनी का असर हुआ और बयानवीरों पर लगाम लगी। जो ये अभिव्यक्त करता है कि आलाकमान का वर्चस्व फिर से स्थापित हो रहा है जो किसी भी संगठन के लिए जरूरी भी होता है।
कल वेणुगोपाल, जयराम रमेश, प्रभारी बाजवा की उपस्थिति में राहुल व जयराम रमेश ने साफ साफ कहा कि इस बार राजस्थान में कांग्रेस चुनाव लड़ेगी और वही चेहरा होगी। ये एक तरह से गहलोत व पायलट को स्पष्ट संकेत था। संगठन ही सर्वोपरि रहेगा, ये संदेश संगठन में अनुशासन तो लायेगा ही।
कुल मिलाकर राहुल की सो दिन की यात्रा ने राहुल व कांग्रेस में बड़े परिवर्तन किए हैं। मगर इन परिवर्तन से मिलने वाले वोट में कितना बदलाव होगा, ये तो चुनाव के समय ही पता चलेगा। राजनीति के जानकर अब ये तो मानते ही हैं कि भारत जोड़ो यात्रा न केवल राहुल अपितु कांग्रेस के लिए फायदेमंद है।
- मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार
