भारत जोड़ो यात्रा अपना 3000 किमी का लंबा सफर करने के बाद कल दिल्ली में पहुंच गई। दिल्ली में जिस तरह से कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता, समर्थक खुलकर सड़क पर आये, उससे कई राजनीतिक संभावनाएं भी जाग गई। पहले पहले विपक्ष जिस तरह से यात्रा को लेकर मजाक उड़ा रहा था, गंभीरता नहीं बरत रहा था, वो भी अब अपना सोच बदल रहा है। यात्रा से राजनीतिक तौर पर इतने बड़े बदलाव की विपक्ष को उम्मीद नहीं थी। सोशल मीडिया पर यात्रा को हल्का करने के विपक्ष के प्रयास भी तोड़ो दिनों बाद दम तोड़ते दिखे। इसमें कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम की भी बड़ी भूमिका रही।
भारत जोड़ो यात्रा के दिल्ली पहुंचने पर अब विपक्ष को ये तो लग गया कि राहुल की जो छवि पेंट की गई थी वो पूरी तरह बदल गयी है। अब उनके बारे में कही गई किसी भी हल्की बात को जनता गंभीरता से नहीं लेती, रिएक्ट भी करने लग गई है। राहुल के राजनीति में आने के समय से लेकर अब तक सोशल मीडिया प्रहार करता रहा मगर कांग्रेस बचाव करती रही। अब राहुल बचाव का मुख्य चेहरा बन गए हैं, जिसका असर कांग्रेस संगठन पर भी दिखने लग गया है।
राहुल की बदली छवि सकारात्मक है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश का बुद्धिजीवी वर्ग अपनी पहल से यात्रा से जुड़ा। अपना समर्थन देने में भी संकोच नहीं किया। बड़े लेखक, चिंतक, राजनीतिक चिंतक, पत्रकार आदि यात्रा में राहुल के साथ चले। योगेंद्र यादव तो यात्रा का हिस्सा तक बन गए। इसके अलावा हर राज्य में वहां का ये बुद्धिजीवी वर्ग राहुल के साथ रहा। जबकि यात्रा के मध्य केवल राजस्थान ही एक ऐसा राज्य था जहां कांग्रेस की सरकार है। अन्य राज्यों में इस वर्ग का समर्थन जताता है कि बुद्धिजीवी वर्ग अब राहुल के राजनीतिक प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेता है और अपनी सहमति भी जता रहा है। ये कांग्रेस को हार की हताशा से निकलने में मदद करेगा।
राहुल की यात्रा से बॉलीवुड के कई सितारे जुड़े। जिनका जनता पर अपना एक असर होता है और वे जनता के राजनीतिक विचार को भी बदलने की क्षमता रखते हैं। बॉलीवुड का यात्रा को समर्थन केवल राहुल को नहीं है, उन मुद्दों को भी है जिन्हें राहुल ने उठाया है। ये विपक्ष के लिए चिंतनीय बात होनी चाहिए। क्योंकि राजनीति भी तो इससे प्रभावित होगी।
राहुल ने यात्रा तमिलनाडु से आरम्भ की, जहां सरकार डीएमके की है और कांग्रेस उसके साथ है। उस राज्य की सफलता से ये तथ्य पुष्ट हुआ कि अपने सहयोगियों को साथ रखने में कांग्रेस व राहुल की यात्रा सफल रही है। महाराष्ट्र में जब यात्रा पहुंची तो उद्धव की शिव सेना व एनसीपी ने भी यात्रा में हिस्सेदारी की। ये महाअगाडी गठबंधन की मजबूती को दर्शाने की बात है। ये गठबंधन अगले आम चुनाव में विपक्ष के लिए चुनोती बनेगा, इसका संकेत साफ मिलता है। इसके अलावा केरल, तेलंगाना, आंध्रा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश व हरियाणा में जो समर्थन यात्रा को मिला, वो विपक्ष की नींद उड़ाने वाला है। क्योंकि लोकतंत्र में चुनाव ही सफलता की ताकड़ी है।
राजस्थान में यात्रा आयी उससे पहले यहां कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं था, मगर उस पर भी लगाम लगी। ये लगाम कितनी असरकारक रहेगी, ये तो आने वाला समय बतायेगा, मगर जनता के बीच तो सरकार की छवि में कुछ सुधार हुआ।
विपक्ष कांग्रेस पर परिवारवाद का हमला करता रहा है मगर यात्रा के मध्य ही संगठन के चुनाव हुए और खड़गे को पार्टी की कमान मिली। वे भी एक्टिव हुए और अपनी छवि आलाकमान की बनाने में सफल रहे। ये कांग्रेस संगठन के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है। बहरहाल, भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल की छवि को बदल दिया है और कांग्रेस संगठन को भी कुछ मजबूती दी है। मगर लोकतंत्र में असल कसौटी चुनाव है। अगले साल 10 राज्यों में होने वाले चुनाव व कांग्रेस को मिलने वाले वोट से ही निष्कर्ष निकलेगा, उसमें बड़ा बदलाव होता है या नहीं, ये चुनाव परिणाम बतायेगा। मगर यात्रा एक पृष्ठभूमि बनाने में अवश्य सफल रही है।

  • मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
    वरिष्ठ पत्रकार