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पीबीएम प्राचार्य एवं नियंत्रक महोदय चिकित्सा व्यवस्था को भी जांचे

बीकानेर,(हेम शर्मा )।एसपी मेडिकल कॉलेज और पी बी एम अस्पताल के नए प्राचार्य एवं नियंत्रक डा.गुजन सोनी में अपने पद की गरिमा के अनुरूप कुछ अच्छा करने की ललक है। वे पीबीएम की सफाई और सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार लोगों पर लाल पीले हुए। व्यवस्था के प्रति जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति पब्लिक पैलेस पर उचित व्यवस्था नहीं होने से स्वाभाविक रूप से नाराज तो होगा ही। पीबीएम प्राचार्य एवं नियंत्रक ने अपना कर्तव्य निभाया है। उनके पास काम नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार है। अधिकारों के इस्तेमाल की हिम्मत होनी चाहिए।( उदाहरण संभागीय आयुक्त डा नीरज के पवन का दिया जा सकता है।) डा.सोनी एसपी मेडिकल कालेज और संबद्ध चिकित्सालय पीबीएम से वर्षों से जुड़े हैं। वे यहां के कॉकस और व्यवस्था की खामियों को बेहतर ढंग से जानते हैं। यह तो जानते ही हैं कि सीनियर डाक्टर आउट डोर में कितने बैठते है? सवाल यह है कि आउट डोर की व्यवस्था सुधारने की कितनी गुंजाइश है। बीमारों को आउट डोर की व्यवस्था सुधारने से कितनी राहत मिलेगी ? नर्सिंग स्टाफ की राजनीति ने पीबीएम की क्या हालत कर रखी है? अच्छे नर्सिंग स्टाफ के सेवा भावना को जनता की नजर से उतार दिया है। चिकित्सा व्यवस्थाओं में विभिन्न स्तर के लपकों और दलालों से चिकित्सा पेश की पवित्रता पर कितने दाग लगे हैं? जांच सुविधा, दवाओं की खरीद, बीमार को रेफर करने का कोकस कितना प्रभावशाली हो गया है। इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप से चिकित्सा व्यवस्था काले धंधे में तब्दील होती जा रही है। यह तब है जब सरकार ने चिरंजीवी योजना, निशुल्क दवा योजना जनहित में दे रखी है। इन योजनाओं का जनता को पूरा फायदा मिले ऐसी व्यवस्था भी है क्या ? समग्र चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने की सख्त जरूरत है। समान पद के डाक्टरों को विश्वास में लेकर और ड्यूटी में कोताही करने वाले डाक्टरों नर्सिंग स्टाफ और जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से ही सुधार संभव है। कड़ी कार्रवाई करने से जनता का समर्थन और व्यवस्था सुधारने से प्रशासन और सरकार का स्वत: समर्थन मिल सकेगा। जरूरत साहस करने की है ताकि पीबीएम की व्यवस्था सुधर जाए। ऐसे ही जैसे सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में आंशिक सुधार दिख रहा है।

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