बीकानेर, बीकाजी इन्टरनेशनल के सहयोग से ज्ञान विधि पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर में आयोजित ‘राजस्थान आर्कियोलाॅजी एण्ड एपिग्राफी कांग्रेस’ के द्वितीय अधिवेषन का उद्घाटन महाराजा गंगा सिंह विष्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व कुलपति प्रो. भगीरथसिंह के करकमलों से हुआ।

इस कांग्रेस में अपने विचार रखते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपनी मातृभाषा में बात करता है तो उसमें उसकी भावनाएं जुड़ी रहती है। इतिहास हमें मनष्य के जीवन को जानने का अवसर प्रदान करता ही है और साथ ही हमंे प्रत्येक सभ्यता की जानकारी भी देता है। प्रो. सिंह ने बताया कि सिंधुघाटी सभ्यता के उत्खनन से हमें भारत की पूर्व षहरी सभ्यता की जानकारी मिलती है। हमें पुरातत्ववादी बनकर आधुनिक को जोड़ने का सार्थक प्रयास करना चाहिए जिससे भारत की संस्कृति और इतिहास का भला हो सके।

कार्यक्रम की षुरूआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप जलाकर की गई। कार्यक्रम में सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए प्रो. बी.एल. भादानी ने कांग्रेस के उद्देष्य पर प्रकाष डालते हुए कहा कि राजस्थान के अनेक विद्वानों और पुरातत्ववेताआंे ने अनेक षिलालेखों पर काम किया जो अत्यंत महŸवपूर्ण है। यह राजस्थान की इतनी समृद्ध विरासत है लेकिन दुःख इस बात का है कि आज भी यह कार्य आगे नहीं बढ पाया। प्रो. भादानी ने पालीवाल जाति के लोगांे द्वारा किये गए कार्यांे की भी जानकारी दी। विषिष्ट अतिथि सहायक निदेषक, काॅलेज षिक्षा डाॅ. राकेष हर्ष ने कहा कि बीकानेर में फोसिल्स पर जब मुझे काम करने का सौभाग्य मिला तब मैंने पाया कि 32 प्रकार की नई जातियां इसमें पाई गई। यह अपने आप में पुरातत्व के क्षेत्र में बहुत ही अलग कार्य है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इतिहासविद् डाॅ. गिरिजाषंकर षर्मा ने कहा कि बीकानेर के इतिहास में जब-जब आर्कियोलोजी पर बात होगी डाॅ. एल.पी. टेस्सीटोरी के अवदान को भुलाया नहीं जा सकता। टैस्सीटोरी ने संस्कृत, प्राकृत, डिंगल, राजस्थानी भाषा पर बहुत काम किया, लेकिन पुरातत्व पर उनका किया गया कार्य सदैव याद रखा जाएगा। इन्होंने बीकानेर में प्राप्त 729 षिलालेखों के माध्यम से राजस्थान के राजवंषों के इतिहास की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में प्रथम अधिवेषन के शोध पत्रों की प्रोसीडिंग्स, जूनी ख्यात एवं डाॅ. मदन लाल मीणा की पुस्तक का लोकार्पण अतिथियों के द्वारा किया गया अंत में काॅलेज के प्राचार्य डाॅ बी एल बिष्नोइ ने आगन्तुकों का आभार प्रकट किया तथा अतिथियों का षाॅल ओढाकर तथा प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अधिवेषन में प्रो बी एल भादानी ,डाॅ. रीतेष व्यास, डाॅ राजेन्द्र कुमार, डाॅ उमा दुबे, डाॅ मुकेष हर्ष, डाॅ गोपाल व्यास तथा गणेष बैरवाल ने विभिन्न विषयों पर प्रर्दिर्षनी लगाई । आयोजन सचिव डाॅ. रीतेष व्यास बताया कि अधिवेषन में पहले दिन चार तकनीकि सत्र हुए।

प्रथम तकनीकि सत्र में डाॅ. उमा दुबे, अलीगढ की सैयद सम्मबुल आरिफ एवं सीकर संग्राहलय की अध्यक्षा धर्मजीत कौर तथा सीकर के पुरातत्वविद् श्री गणेष बैरवाल ने पत्र-वाचन किया। दूसरे तकनीकि सत्र में नीम का थाना के डाॅ. मदन लाल मीणा, जयपुर के डाॅ. जफरउल्लाह, उदयपुर के प्रो. जीवनसिंह खड़कवाल और कोटा के वृत्त अधिक्षक उमरावसिंह ने पत्र-वाचन किया