लॉक डाउन का फायदा उठा रहे केमिस्ट वाले उच्च दर से बेच रहे दवाई

आगरा । (ओम एक्सप्रेस न्यूज़ रिपोर्ट अवधेश यादव) आगरा वैसे तो शहर में भोजन और सूखा राशन बांटने का सिलसिला जरूर दिखाई पड़ रहा है लेकिन अधिकांश मोहल्लों के गरीबों की सुध लेने वाला कोई दिखाई नहीं पड़ रहा अधिकांश जगहों पर लोग घरों में बैठने को जरूर मजबूर हैं लेकिन अभी तक घरों में जो भी कुछ अनाज और खाद सामग्री थी वह सब खत्म हो चुकी है लोग दिनोंदिन भुखमरी की तरफ बढ़ रहे हैं कहीं-कहीं तो लोग घरों में बीमार हैं काम ना मिलने के कारण घर की पूंजी भी खत्म हो गई है पैसों के अभाव के कारण दवाइयां भी नहीं मिल रही है लोग घरेलू नुस्खा अपनाकर अपना घर में ही इलाज कर रहे हैं लेकिन बड़े-बड़े दावे करे जा रहे हैं जहां अधिकारी से लेकर नेता तक अपनी पीठ थपथपा ने में लगा है बातों के पहाड़ संजोय जा रहे हैं जहां शहर की अनेकों बस्ती में भूखे लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है लोग लॉक डाउन के चलते वहां तक पहुंचा पा रहे हैं देखने वाली बात है इन दावों में कितनी हकीकत है मेडिकल दवाइयों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं शहर के हॉस्पिटल तथा मोहल्लों में अति आवश्यक सामग्री दवाइयां की आवक होने से लोग दैनिक के सामानों को उच्च दर पर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं वहीं दुकानदारों द्वारा अपनी पीड़ा को भी बयान किया जा रहा है है कि हमें वस्तुएं लॉक डाउन के चलते महंगी प्राप्त हो रही हैं हर एक ही अपनी मजबूरी है उसी मजबूरी का फायदा उठाने में लगे लोग आम आदमी की पीड़ा नहीं समझ पा रहे हैं एक और मरीजों के लिए दवाई की किल्लत हो रही है जहां दवाई का रेट 1 70 से लेकर 180 थी वही उसका दाम अब ₹360 हो गया है 150 वाली दवाई 260 में मिल रही है आवक की कमी के कारण दवाइयों से लेकर डॉक्टरों की फीस व अन्य दैनिक वस्तुएं भी महंगी हो गई है यह जब है जब कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के कारण कई गरीब परिवार ऐसे हैं जिनके लिए दो वक्त का खाना जुटाना तक मुश्किल हो गया है। इनमें दिहाड़ी मजदूर और ऐसे

ऐसे में पुलिस प्रशासन के साथ-साथ कई एनजीओ, समाजसेवी और आम लोग हैं जो इन लोगों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। सब मिलकर इन्हें खाना, राशन और बाकी जरूरत के सामान उपलब्ध करवा रहे हैं। तो कहीं शहर मैं लोग अपने चहेतों को राशन देकर फोटो खिंचवाने में लगे हुए हैं अधिकांश जगहों पर तो लोग भुखमरी की कगार पर है हद तो वहां हो जाती है जब भूखे प्यासे गरीब लोग चक्कर काटते रहते हैं लेकिन चहेती महिलाओं को हाथ में आटा देकर साथ में फोटो खिंचवाना और नगर निगम की फॉकिंग सैनिटाइजर गाड़ी के सामने चल कर फोटो खिंचवाने से भी बाज नहीं आ रहे शहर के बीच बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने गरीबों की इस हालत को सिर्फ एक फोटो खिंचाने का जरिया बना लिया है।

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ऐसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाए. कई लोग हैं जो मदद कम करते हैं और फोटो ज्यादा खिंचवाते हैं। ऐसे लोगों ने गरीबों की इस हालत का मजाक बनाकर रख दिया है।