बीकानेर, । रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में भक्तामर प्रसारिका, महत्तरा पद से विभूषित साध्वीश्री मृगावती, सुरप्रिया व नित्योदया के सान्निध्य में चल रहे 22 दिवसीय श्री भक्तामर पूजन व अभिषेक विधान के चौथे दिन गुरुवार को भक्तामर स्तोत्र की सातवीं व आठवीं  गाथा का अभिषेक व पूजन किया गया। पूजा व प्रभावना का लाभ लालचंद, पुष्पादेवी बोथरा, प्रमिला गोलछा, अनोपचंद, रंजन व कुसुम खजांची परिवार ने लिया।
  साध्वीश्री मृगावती ने प्रवचन में कहा कि एक बार सच्चे दिल व आत्मा से लिया गया परमात्मा का नाम व निष्काम भक्ति जन्म-जन्मों के पापों को दूर कर देती है। परमात्मा की भक्ति के अलावा कोई पापों को क्षय करने में समर्थ नहीं है। भक्ति में विभक्ति नहीं होनी चाहिए। रोम-रोम व श्वास-श्वास अस्थि की हर मज्जा में परमात्मा की भक्ति करने से अनादिकाल से चल रही पापा बंधन की परम्परा टूट जाती है। देवादीदेव प्रभु की शब्द शक्ति आराधक के आराध्य के रूप् में काम करते हुए अनिष्ठ व संकट दूर करती परमात्मा की शक्ति ही पापकर्म की संतति का नाश कर सकती है।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा  ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, चातुर्मास व्यवस्था समिति के हस्तीमल सेठी, अनिल सुराणा, भीखमचंद बरड़िया, पूनम चंद नाहटा ने खैरागढ ़(छतीसगढ़) के संध के अध्यक्ष वरिष्ठ श्रावक राजेन्द्र डाकलिया, नमन व दिव्य राजा डाकलिया का श्रीफल, माला व तिलक से अभिनंदन किया। साध्वीश्री मृगावतीजी के सांसारिक भाई राजेन्द्र डाकलिया व उनके भतीजे नमन व दिव्य राजा डाकलिया ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए।