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राजस्थान नगर पालिका में किसी भी चेयरमैन को हटाना आसान नहीं

राजस्थान नगर पालिका दुनिया में परिवर्तन के बाद किसी भी चेयरमैन वाइस चेयरमैन को अविश्वास प्रस्ताव से हटाना आसान नहीं है।
यह चेयरमैन और वाइस चैयरमैन की खूबी/योग्यता या अयोग्यता से संबंध नहीं है। नियम ही ऐसा बन गया है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले उस संख्या तीन चौथाई तक पहुंच ही नहीं पाते। नियम के मुताबिक अब चेयरमैन वाइस चेयरमैन को हटाने के लिए कुल वोट संख्या का तीन चौथाई हिस्सा चाहिए। चेयरमैन के पास चौथाई हिस्सा है तो वह हटाया नहीं जा सकता। पहले दो तिहाई मतों की आवश्यकता होती थी वहां तक जोर लगा कर जोड़ तोड़ बड़ा बंदी कर पहुंच जाते थे फिर भी सफलता मिले या नहीं मिले इसकी गारंटी नहीं होती थी।

यही हाल वर्तमान कांग्रेस बहुमत वाले बोर्ड का भी है। ओमप्रकाश कालवा का जबानी विरोध है वह भी रोते पड़ते ही है। कालवा को हटाने के लिए 35 पार्षद चाहिए। वह संभव ही नहीं है। विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के 12 पार्षद चुने गए लेकिन चेयरमैन के चुनाव के वक्त भारतीय जनता पार्टी को केवल 11 वोट मिले यानी कि 1 वोट कम हुआ।

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