जयपुर,(दिनेश शर्मा “अधिकारी “)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने “करोड़ों के घोटाले और रोडवेज की संपत्ति कोर्ट में अटैच कराने के मामले में ” प्रार्थी अधिवक्ता “मानहानि एवं आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में अपराध के मामले में “ की शिकायत पर प्रसंज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर तत्कालीन और वर्तमान अध्यक्ष एवं प्रबंधक, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम, आयुक्त परिवहन एवं सड़क सुरक्षा, को नोटिस जारी कर 2 जनवरी तक रालसा कार्यालय में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं।
रालसा ने जारी अपने आदेश में तत्कालीन रोडवेज प्रबंधक संदीप वर्मा की ओर से प्रार्थी अधिवक्ता शशीकांत सैनी के विरुद्ध “ मिथ्या एवं बेबुनियाद और अर्नगल आरोप ” लगाते हुए राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता आरपी सिंह को तुरंत हटाने के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। तत्कालीन गृह सचिव अभय कुमार और आयुक्त कन्हैयालाल स्वामी के द्वारा तथ्यों की सही जानकारी न करते हुए प्रार्थी के विरुद्ध मानहानि करने के उद्देश्य से राज्य के कई समाचार पत्रों में 21 अक्टूबर 2022 को अपमानजनक अपुष्ट समाचार प्रकाशित कराए गए। तत्कालीन रोडवेज प्रबंधक संदीप वर्मा द्वारा बिना किसी विभागीय जांच के करोड़ों रुपए की राजस्थान सरकार के रोडवेज विभाग की संपत्ति को कोर्ट में अटैच कराने के मामले में राज्य संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के इस मामले में कुछ अधिकारियों द्वारा एक अधिवक्ता के विरुद्ध इस तरह के समाचार प्रकाशन से स्वत: ही मानहानि के कृत्य मे शामिल हो गए। इस पर प्रार्थी ने रालसा कार्यालय में आईपीसी की धारा 166, 504, 505, 506 और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में अपराध करते हुए राज्य के विभिन्न समाचार पत्रों में समाचार का प्रकाशन कराया, प्रार्थी की इस शिकायत पर रालसा जयपुर कार्यालय में प्री लिटिगेशन प्रकरण में दर्ज करते हुए नोटिस जारी कर 2 जनवरी 23 तक राज्य सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए।
उल्लेखनीय है कि राज्य के विभिन्न समाचार पत्रों में “रोडवेज सीएमडी ने एएजी को हटाने की मांग उठाई “ “103 करोड़ की रिकवरी मामले में रोडवेज की संपत्ति अटैच कराने में एएजी की संदिग्ध भूमिका: संदीप वर्मा “ “ रोडवेज सीएमडी ने सीएस को पत्र लिखकर आशापुरा ट्रेड एवं ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अधिवक्ता शशीकांत सैनी और जयवर्धन सिंह शेखावत रोडवेज के खिलाफ केस लड़ रहे हैं “ दोनों ही एएजी मेजर आरपी सिंह के डेजिग्नेटिड एसोसिएट है”
“ रोडवेज सीएमडी ए ए जी के बीच टकराहट का मामला राज्य सरकार तक पहुंचा “ सीएमडी वर्मा ने एएजी मेजर आर पी सिंह के खिलाफ पत्र भेजा, ए ए जी ने सीएमडी की शिकायत के लिए सीएम से समय मांगा “
“ एमडी ने सीएस को लिखा पत्र” “एएजी की टीम ही सरकारी सम्पत्तियों को कोर्ट में अटैच करवा रही “
इन तमाम हेडलाइंस में राज्य के विभिन्न समाचार पत्रों में इस समाचार को प्रकाशित करवा कर राज्य सरकार के मुख्य सचिव, आयुक्त संदीप वर्मा और तत्कालीन गृह सचिव अभय कुमार ने प्रार्थी के विरुद्ध विभिन्न आईपीसी की धाराओं में मानहानि का अपराध एक सोची समझी साजिश रचते हुए किया है और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में भी अपराध किया गया है जोकि बिना किसी विभागीय जांच के इस तरह के आरोप को प्रकाशित करवा कर प्रार्थी के विरुद्ध जघन्य अपराध किया है जिससे समाज में प्रार्थी की मानहानि हुई है प्रार्थी अधिवक्ता जैसे नोबल पेशे में समाज के एक वर्ग में अपना सम्मानीय वजूद रखता है प्रार्थी की छवि को धूमिल करने के इरादे से राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों ने जघन्य अपराध किया है।