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शराब की दुकान का आवंटन अब भाग्य का नहीं बल्कि जिगर का होगा खेल

– शराब की दुकान का आवंटन अब भाग्य का नहीं बल्कि जिगर का होगा खेल, 23 फरवरी से ऑनलाइन होगी निलामी
जयपुर. राजस्थान में शराब (wine) के कारोबार में अब भाग्य (Luck) के दिन लद गये हैं. अब इस खेल में नसीब वालों की जगह जीगर वालों को तरजीह मिलेगी. जो जितना बड़ा दांव लगाएगा वहीं बादशाह (King) कहलायेगा. प्रदेशभर में 23 फरवरी से शराब की सात हजार से अधिक दुकानों के लिए ऑनलाइन निलामी (Online auction) शुरू होने वाली है. एक अदद शराब की दुकान के लिए जेबें भरी होने के साथ ही खरीदने वाले का जिगर भी मजबूत होना जरुरी है.

अब तक शराब का ठेका लेना नसीब पर तय होता था. जिसकी लॉटरी लगती उसे ही शराब का ठेका मिल जाता था. लेकिन आबकारी विभाग की नई शराब नीति आने के बाद अब शराब के ठेके का आवंटन नसीब के बजाय जिगर वालों का खेल हो गया है. नई आबकारी नीति में लॉटरी के बजाय निलामी के जरिये आवंटन तय किया जायेगा. मरुधरा में शराब की 7665 दुकानों की नीलामी के लिये ऑनलाइन प्रकिया शुरू हो गई हैं. निलामी के लिए हर ठेके की रिजर्व प्राइज तय की गई है. यानि हर ठेके की एक तय कीमत होगी फिर उसके अनुसार ही बोली लगेगी।

प्रदेश का सबसे महंगा ठेका डूंगरपुर के खजूरी का है
रिजर्व प्राइस के जो तथ्य सामने आए हैं वो सभी को हैरान करने वाले हैं. प्रदेश के 6 सबसे महंगे शराब ठेके डूंगरपुर,बांसवाड़ा और उदयपुर में स्थित हैं. प्रदेश का सबसे महंगा ठेका डूंगरपुर के खजूरी का है. इसकी रिर्जव प्राइज 18.99 करोड़ रुपये है. ये ठेका गुजरात बोर्डर के समीप है. गुजरात में शराबबंदी है. इसलिए वहां शराब का सबसे ज्यादा उठाव होता है. इसी कारण इनकी रिजर्व प्राइज ज्यादा है. जयपुर आबकारी अधिकारी सुनील भाटी ने बताया कि जिस दुकान की जितनी मिनिमम रिजर्व प्राइज है उसी से नीलामी की बोली लगना शुरू होगी. इसके लिये निलामी में हिस्सा लेने वाले खरीदारों ने भी कमर कस ली है. आबकारी विभाग को उम्मीद है कि कोरोना काल की घाटा पूर्ति उसे नई पॉलिसी के जरिये हो जायेगी.

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