

रिपोर्ट – अनमोल कुमार
बगहा।उत्तर प्रदेश के के.बी.हिंदी सेवा न्यास, बिसौली,जिला बदायूं ने अपने 7 वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बगहा के पंडित उमाशंकर तिवारी महिला कालेज के इतिहास के प्रो. अरविंद नाथ तिवारी को सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सम्मान से रविवार को सम्मानित किया गया ।इस सम्मान समारोह का आयोजन आर.के.इंटरनेशनल स्कूल बिसौली में के.बी.हिंदी सेवा न्यास, बिसौली, के अध्यक्ष सतीश चन्द्र शर्मा के तत्वाधान में किया गया। उक्त आशय की जानकारी देते हुए प्रो. अरविंद नाथ तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ०खेम सिंह लहेरिया, कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, भोपाल, विशिष्ट अतिथि त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपला से प्रो. देवीलाल पंत, प्रो०घनश्याम परिश्रमी, प्रो. राम स्नेही लाल शर्मा रहें।


मुझे इन महान विभूतियों के कर कमलों से आज सम्मानित किया गया है। यह सम्मान, मेरी पुस्तक महानायक मंगल पाण्डेय और कई राष्ट्रीय शोधात्मक आलेंखों पर चयन समिति के विचारोंपरांत प्रदान की गयी है।उल्लेखनीय है कि प्रो.अरविंद नाथ तिवारी को अब तक 21सम्मान मिल चुका हैं, जिसमें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान शामिल हैं। प्रो.तिवारी ने आगे बताया कि कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपल से प्रो. देवीलाल पंथी ने गजल और चारू पर अपनी अभिव्यक्ति प्रकट करते हुए बताया कि भारत और नेपाल के साहित्यकार कैसे इस पर काम कर रहें हैं और कैसे दोनों देशों के साहित्यकारों को मिलकर काम करना है, इस पर विधिवत चर्चा की। वहीं प्रो घनश्याम परिश्रमी ने चर्चा के दौरान बताया कि नेपाली और हिन्दी संस्कृत की उपज हैं। इसलिए भारत और नेपाल दोनों एक ही देश हैं दोनों भाई हैं।


आगे कहा कि संस्कृत भारत और नेपाल में आज भी बोले, पढ़े और लिखें जाते हैं।वहीं मुख्य अतिथि डाॅ०खेम सिंह लहेरिया, कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, भोपाल ने अभिव्यक्ति दौरान कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिन्दी को संयुक्तराष्ट्र संघ का सम्पर्क भाषा बनाने का सार्थक प्रयास किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्पर्क के छ:भाषाओं के बाद हिंदी बहुत जल्द सातवीं भाषा बनकर रहेंगी।गुरूदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने हिन्दी का मान सम्मान बढाया, गीतांजली हिन्दी भाषा में उनकी काव्य रचना है। भारत के उन्नीस प्रांत से साहित्यकारों की उपस्थिति रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ने अपपने अभिव्यक्ति में कहा कि हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए भागीरथ प्रयास होनी चाहिये, इस साहित्य गंगा में डूबकी लगाने के लिए आप सभी को धन्यवाद है। वहीं प्रशंसनीय संचालन डाॅ नितीन सेठी ने किया।
