

-पांच दिवसीय त्यौहारों का संगम है दीपमालिका पर्व
दुनिया में भर के सैंकड़ों देशों के मुकाबले भारत की संस्कृति का कोई सानी नही है । पूरी दुनिया में भारत अपनी संस्कृति, सभ्यता व नाना प्रकार की अद्वितीय विविधताओं के लिए अपनी अलग ही पहचान रखता है । यहां पर जीवन का हर उत्सव व रंग मौजूद है । एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जहां की संस्कृति अनमोल, अद्भूत व बेजोड़ व नायाब है । जहां हर तिथि अपने आप में किसी त्यौहार से कम नही होती है । अनेकानेक देवी-देवताओं, महापुरूषों, वीर-वीरांगनाओं के साथ-साथ नदियां, पर्वत आदि से जुड़ी यह पावन व पवित्र भूमि वंदनीय और पूजनीय है । जिस प्रकार आकाश में सूर्य के समान छोटे-बड़े अनन्त सितारे है वैसे ही दीपावली जैसे रंग और खुशी से भरे अनेक त्यौहार भारतीय संस्कृति में विद्यमान है । जो आम जीवन को खास और विशिष्ट बनाते है । दीपावली का पर्व भारत के साथ-साथ दुनिया भर के कई देशों में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अपने साथ खुशी, उत्साह और ढ़ेर सारा उमंग लेकर आता है। दीपावली का पर्व सृष्टि में नव उत्साह व नव उमंग का संचार करता है ।
दीपावली का अर्थ है दीपों की अवली मतलब दीपों की पंक्ति। कार्तिक माह के अमावस्या को दीपावली का पर्व अनेक दीपों के प्रकाश के साथ मनाया जाता है। प्रभु श्री राम के चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापस आने की खुशी में दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है । दीवाली रोशनी का त्यौहार तो है ही, साथ में खुशियां भी लाती है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर कोई इस दिन का बेसब्री से इंतजार करता है। नए कपड़ों, रंग-बिरंगी सजावटी सामान, मिठाइयों और रंगोली के सामान से बाजारों में रौनक आ जाती है। लोग जमकर खरीदारी करते हैं और अपने-अपने घरों को सजाते हैं। इस दिन पूरे देश में खुशी का माहौल रहता है। दीपावली का पर्व हमें अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है । दीपावली का त्यौहार हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना गया है। यह त्यौहार कई तरह के महत्व अपने अंदर समेटे हुए हैं । दीपावली का पर्व आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही विशिष्ट महत्व रखता है । क्योंकि इसी दिन समुंद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। दीपावली के ही दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुए थे। दीपावली के पावन अवसर पर आर्य समाज की स्थापना हुई थी। दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था। 1577 में इसी दिवस पर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी गई थी। साथ ही दीपावली के आसपास खेतों में फसलें पककर तैयार हो जाती है । जिससे किसानों को आर्थिक सम्बल मिलता है ।
दीपावली का त्यौहार 5 पर्वां का संगम है । जिसका पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है । धनतेरस के दिन लोग नये वाहन, मकान, गहने, बर्तन आदि की खरीददारी करते है । वहीं दीपावली का दूसरा दिन नरक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को मार गिराया था। इस दिन को छोटी दीवाली के रूप में मनाया जाता है । तीसरा दिन दीपावली त्यौहार का मुख्य दिन होता है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ विद्या की देवी मां सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दीपावली के चौथे दिन को गोवर्धन की पूजा की जाती है । दीपावली त्यौहार के आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन, भाई को रक्षा सूत्र बाँधती हैं ।
भारत को त्यौहारों का देश भी कहा जाएं तो भी कोई अतिश्योक्ति नही होगी । भारत भूमि के कोने-कोने में अनेक त्यौहार व पर्व मनाये जाते है । दीपावली का पर्व भारत के सभी त्यौहारों में सबसे बड़ा त्यौहार है । असत्य पर सत्य की विजय, आपसी प्रेम, भाईचारे व अपनेपन का संदेश देता यह दीपावली पर्व हम सब लोगों के लिए मंगलकारी बने । जीवन में सुख व समृद्ध लाने वाला बने । इन्हीं कामनाओं के साथ सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।
