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अटल इरादों से लिखी जाती है सफलता की इबारत

सोनी परिवार के कलाकार अंशुल सोनी का वीडियो रिलीज
— राजेंद्र सोनी चंडीगढ़
जिला हनुमानगढ़ के कस्बा संगरिया की “श्री जुबली राम नाटक कल्ब” की चर्चा किसी समय संगरिया ही नहीं बल्कि दूर दराज तक परवान थी। श्री शिवदयाल गुप्ता व श्री राम प्रताप वर्मा द्वारा अभिनय में पारंगत किए कलाकार जब रामायण के पात्रों की भूमिका अदा करते थे तो दर्शक दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते थे। दर्शक आपस में बतियाते हुए कहते कि रामलीला का मंचन हो तो ऐसा। वहीं एक चर्चा दर्शकों की जुबान पर यह भी रहती कि “सोनी पुत्रो” के बगैर रामलीला का मंचन फीका है क्योंकि श्री मिठ्ठन लाल सोनी के पुत्र प्यारे लाल, जय पाल, बाबू राम, वेद प्रकाश, कृष्ण लाल, प्रदीप कुमार, राज कुमार, राजेंद्र शम्मी, जगदीश कुमार और विजय कुमार इस कल्ब द्वारा मंचित रामलीला में अहम किरदार निभा रहे थे। यहां तक कि नब्बे के दशक में कृष्ण लाल सोनी को कपड़ा व्यवसायी श्री श्याम लाल गोयल तथा सतपाल जिंदल द्वारा स्वर्ण पदकों से भी नवाजा गया था। इसी दौरान कस्बे में श्री राम नाटक कल्ब की स्थापना हुई। श्री राम नाटक क्लब में भगवान श्रीराम का किरदार राजेंद्र शम्मी नें निभाया परंतु 02-06-2001 को शम्मी देवलोक गमन कर गए। शम्मी ने श्रीराम की भूमिका अदा कर दशकों पर अभिनय की वह छाप कायम की कि उन्हें याद कर आज भी संगरिया वासियों की आंखें नम हो जाती हैं वहीं रामभक्त कान्हा राम अग्रवाल, पवन गुलाटी, गोबिंद वर्मा वगैरह आज भी उनकी पूजा अर्चना करते हैं। स्वर्ण पदक से सुशोभित कृष्ण लाल के दोहिते अंशुल नें अपने नाना के पदचिन्हों पर चलते हुए अभिनय क्षेत्र में कदम रखा है।

वैसे आसमान की बुलन्दियो को छुने की तमन्ना तो हर किसी के दिल मे होती है मगर सफलता की इबारत वो ही लिख पाते है जिनके इरादे अटल हो, कुछ कर गुजरने का साहस हो जिनके दिल ओर दिमाग मे।जोश ओर जनुन का भूत सवार हो क्योंकि कि नाज-ए-सफर तक पहुंचने की राह आसान नही होती और मंजिल की चाहत मुसाफिर को सकुन से सोने नही देती। भौतिक सुखो का परित्याग कर रात दिन तपस्या मे विलीन होना पडता हैं! कुछ ऐसा ही करने का जज्बा रखता है कृष्ण लाल सोनी का दोहिता अंशुल सोनी, जिसने अपने बलबूते पर अभिनय क्षेत्र में सफलता हासिल की है जिसका श्रेय कृष्ण लाल को ही है।

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